श्रवण गर्ग | दुनिया का भाग्य तय हो रहा है, लेकिन भारत कहीं दिखाई नहीं दे रहा
‘हरकारा डीप डाइव’ के इस विस्तृत इंटरव्यू में वरिष्ठ पत्रकार निधीश त्यागी और वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग ने डोनाल्ड ट्रंप की बीजिंग यात्रा, चीन-अमेरिका संबंधों, ब्रिक्स की नई दिल्ली बैठक, ईरान युद्ध, वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत की विदेश नीति की दिशा पर विस्तार से चर्चा की. बातचीत की शुरुआत इस सवाल से होती है कि आखिर क्यों पूरी दुनिया की निगाहें ट्रंप और शी चिनफिंग की मुलाकात पर टिकी हुई हैं, जबकि भारत के भीतर मीडिया और राजनीतिक विमर्श कहीं और भटका हुआ दिखाई देता है.
श्रवण गर्ग ने कहा कि इस समय दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक और आर्थिक घटनाक्रम एक साथ घटित हो रहे हैं. अमेरिका और चीन के बीच तनाव, ईरान संकट, ताइवान विवाद, एआई और सेमीकंडक्टर की लड़ाई, और वैश्विक व्यापार का पुनर्गठन. उनके अनुसार यह केवल दो नेताओं की मुलाकात नहीं है, बल्कि आने वाले वर्षों की वैश्विक आर्थिक और सामरिक दिशा तय करने वाली वार्ता है. उन्होंने कहा कि अगर यह वार्ता विफल होती है तो उसका असर दुनिया के शेयर बाजारों, तेल व्यापार, एआई उद्योग और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं तक पर पड़ सकता है.
बातचीत में श्रवण गर्ग ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि भारतीय मीडिया इन घटनाओं को अपेक्षित गंभीरता से क्यों नहीं दिखा रहा. उन्होंने कहा कि जब ब्रिक्स की अध्यक्षता भारत के पास आई थी तब उसका व्यापक प्रचार हुआ था, लेकिन अब जब नई दिल्ली में ब्रिक्स के विदेश मंत्रियों की बैठक चल रही है, तब उसकी चर्चा लगभग गायब है. उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इस बैठक में ईरान और यूएई जैसे परस्पर विरोधी देश भी मौजूद हैं, लेकिन भारतीय दर्शकों को इस जटिल कूटनीतिक परिदृश्य की जानकारी तक नहीं दी जा रही.
ट्रंप प्रशासन इस समय कई मोर्चों पर दबाव में है. एक ओर ईरान संकट और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य का खतरा है, दूसरी ओर चीन के साथ व्यापार युद्ध और ताइवान विवाद. श्रवण गर्ग के अनुसार अमेरिका चाहता है कि चीन ईरान पर प्रभाव डालकर तनाव कम करवाए और हॉर्मुज़ को खुला रखे, क्योंकि तेल आपूर्ति बाधित होने से वैश्विक मंदी का खतरा बढ़ सकता है. वहीं चीन इस स्थिति का उपयोग अमेरिका से बेहतर व्यापारिक और रणनीतिक शर्तें हासिल करने के लिए करना चाहता है.
इंटरव्यू में ताइवान को लेकर चीन की रणनीति पर भी विस्तार से चर्चा हुई. श्रवण गर्ग ने कहा कि चीन चाहता है कि अमेरिका ताइवान के प्रश्न पर पीछे हटे और उसकी स्वतंत्रता समर्थक राजनीति को खुला समर्थन न दे. उन्होंने कहा कि चीन स्पष्ट संकेत दे चुका है कि यदि ताइवान मुद्दे को “गलत तरीके” से संभाला गया तो अमेरिका और चीन के बीच टकराव और बढ़ सकता है.
बातचीत में एआई और सेमीकंडक्टर युद्ध को भी प्रमुख मुद्दा बताया गया. श्रवण गर्ग ने कहा कि अमेरिका लंबे समय से चीन पर बौद्धिक संपदा चोरी और तकनीकी प्रतिस्पर्धा को लेकर आरोप लगाता रहा है. उन्होंने दावा किया कि एनवीडिया चिप्स को लेकर दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण समझौते की कोशिशें चल रही हैं और कुछ चीनी कंपनियों को अमेरिकी चिप्स की आपूर्ति पर सहमति बनना एक बड़ा संकेत माना जा रहा है. उनके अनुसार एआई और एडवांस सेमीकंडक्टर आने वाले समय की वास्तविक वैश्विक शक्ति तय करेंगे.
भारत की स्थिति पर श्रवण गर्ग ने सवाल उठाया कि जब दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण वार्ताएं चल रही हैं, तब भारत स्वयं को निर्णायक भूमिका में क्यों स्थापित नहीं कर पा रहा. उन्होंने कहा कि भारत न तो चीन-अमेरिका वार्ता के केंद्र में दिखाई देता है, न ही ईरान संकट के समाधान में उसकी सक्रिय भूमिका स्पष्ट है. उनके अनुसार यह स्थिति भारत की विदेश नीति की सीमाओं और कूटनीतिक असमंजस को भी उजागर करती है.पूरी वीडियो यहाँ देखी जा सकती है.

