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श्रवण गर्ग | मोदी जी जब रिकॉर्ड कायम करते जाएंगे, तब जनता अपने अधिकार खोने के भी रिकॉर्ड कायम करती जाएगी.

‘हरकारा डीप डाइव’ के इस विशेष लाइव एपिसोड में निधीश त्यागी ने वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के 12 वर्ष पूरे होने के वास्तविक राजनीतिक व लोकतांत्रिक अर्थों पर विस्तृत चर्चा की. भाजपा जहां इसे जवाहरलाल नेहरू के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ने वाली ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में मना रही है, वहीं श्रवण गर्ग ने देश में बढ़ते सामाजिक ध्रुवीकरण, नागरिक अधिकारों की स्थिति, संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता और रुपये की गिरती स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है. इसके साथ ही, अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में भारतीय नाविकों की मौत के संदर्भ में भारत की विदेश नीति, संप्रभुता और वैश्विक प्रतिष्ठा का एक तीखा व निष्पक्ष विश्लेषण पढ़ें.

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श्रवण गर्ग | आज अगर विपक्ष कमजोर है और मीडिया अपनी भूमिका में नहीं है, तो जुडिशरी की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है

हरकारा डीप डाइव’ के इस विशेष लाइव एपिसोड में निधीश त्यागी ने वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग से भारतीय न्यायपालिका की मौजूदा स्थिति, उसकी विश्वसनीयता और पिछले 12 वर्षों में लोकतांत्रिक संस्थाओं के बदलते स्वरूप पर विस्तृत बातचीत की. श्रवण गर्ग ने लंदन में भारत के जजों, वकीलों और केंद्रीय मंत्रियों के बीच दिखी नजदीकियों, जजों के लिए तय आचार संहिता, सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने वाले हालिया अध्यादेश और अदालतों में लंबित नियुक्तियों पर बेबाक राय रखी है. इसके अलावा, इंडियन एक्सप्रेस में आपातकाल के अपने अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने न्यायपालिका, कार्यपालिका, विधायिका और मीडिया के मौजूदा संकट का एक तुलनात्मक व ऐतिहासिक विश्लेषण प्रस्तुत किया है.

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श्रवण गर्ग | राहुल गांधी समझ चुके हैं कि क्षेत्रीय दल आधुनिक भारत की रियासतें हैं

‘हरकारा डीप डाइव’ के इस विशेष कूटनीतिक और राजनीतिक एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग और निधीश त्यागी ने इंडिया गठबंधन (INDIA Alliance) की हालिया बैठक और विपक्षी राजनीति के भविष्य पर विस्तृत चर्चा की है. विश्लेषण में बताया गया है कि हाल के राजनीतिक झटकों के बाद कैसे क्षेत्रीय दल अपने राज्यों में रक्षात्मक स्थिति में हैं, जबकि कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के खिलाफ मुख्य संघर्षकर्ता के रूप में उभरी है. उत्तर प्रदेश में सपा-कांग्रेस समीकरण, आम आदमी पार्टी की भूमिका और आगामी 2027 व 2028 के चुनावों में विपक्ष की जमीनी चुनौतियों पर पढ़ें यह पूरा विश्लेषणात्मक आलेख.

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श्रवण गर्ग | देश की जनता आश्वासन चाहती है कि आपातकाल नहीं लगेगा

‘हरकारा डीप डाइव’ के इस लाइव एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग और निधीश त्यागी ने 6 जून को दिल्ली में प्रस्तावित 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के आंदोलन, अभिजीत दीपके की भारत वापसी और राहुल गांधी के हालिया बयानों के राजनीतिक निहितार्थों का विश्लेषण किया है. श्रवण गर्ग ने CJP की अचानक बढ़ती लोकप्रियता, उसकी फंडिंग और वास्तविक उद्देश्यों पर सवाल उठाते हुए इसकी तुलना 2011 के 'इंडिया अगेंस्ट करप्शन' आंदोलन से की है. नीट परीक्षा घोटाले से उपजे छात्र असंतोष और जून के महीने में आपातकाल (1975) की चर्चाओं के दोबारा उभरने पर पढ़ें यह पूरा राजनीतिक विमर्श.

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श्रवण गर्ग | नेहरू के पुण्य स्मरण के बहाने ‘भारतीयता’ की खोज  

वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक टिप्पणीकार श्रवण गर्ग ने पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा प्रतिपादित 'भारतीयता' के विचार और वर्तमान राजनीतिक-सामाजिक परिदृश्य का एक मर्मस्पर्शी विश्लेषण किया है. लेखक ने साल 2019 के एक मशहूर ऑनलाइन फूड डिलीवरी विवाद (खाने का कोई धर्म नहीं होता) को याद करते हुए बताया है कि कैसे वे ऐतिहासिक संकेत आज 2026 के भारत में सच साबित हो रहे हैं, जहाँ इतिहास बदलने के साथ-साथ नागरिकों की पहचान और अधिकारों की परिभाषा भी बदली जा रही है. पढ़ें पूरा लेख.

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श्रवण गर्ग | क्या सीजेआई द्वारा की गई एक टिप्पणी, 140 करोड़ के देश में किसी बड़े आंदोलन का ट्रिगर बन सकती है? 

वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग और निधीश त्यागी के डिजिटल शो 'हरकारा डीप डाइव' का विस्तृत विश्लेषण. इस इंटरव्यू में अचानक उभरी 'कॉकरोच जनता पार्टी' के पीछे छिपे भू-राजनीतिक और वैचारिक खेल पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं. जानिए कैसे 1974 के जेपी आंदोलन और 2011 के अन्ना आंदोलन की तर्ज पर इस नए डिजिटल प्रयोग को स्थापित राजनीतिक व्यवस्था और विपक्ष दोनों को कमजोर करने वाली एक 'साजिश' के रूप में देखा जा रहा है. पढ़ें पूरी रिपोर्ट.

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श्रवण गर्ग | भारत की अर्थव्यवस्था अब वित्तीय आपातकाल जैसे दौर में है.

वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग और निधीश त्यागी ने 'हरकारा डीप डाइव' के लाइव इंटरव्यू में भारत के मौजूदा आर्थिक संकट का एक बेहद डरावना और यथार्थवादी विश्लेषण प्रस्तुत किया है. श्रवण गर्ग का दावा है कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा नागरिकों से बचत करने की अपील और बैंकों से जनता द्वारा नकदी निकालकर घरों में रखना, देश में एक 'अघोषित वित्तीय आपातकाल' (अनुच्छेद 360) की आहट है. पढ़ें इस गहन चर्चा के मुख्य बिंदु.

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श्रवण गर्ग | दुनिया का भाग्य तय हो रहा है, लेकिन भारत कहीं दिखाई नहीं दे रहा

‘हरकारा डीप डाइव’ के इस विस्तृत इंटरव्यू में वरिष्ठ पत्रकार निधीश त्यागी और वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग ने डोनाल्ड ट्रंप की बीजिंग यात्रा, चीन-अमेरिका संबंधों, ब्रिक्स की नई दिल्ली बैठक, ईरान युद्ध, वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत की विदेश नीति की दिशा पर विस्तार से चर्चा की. बातचीत की शुरुआत इस सवाल से होती है कि आखिर क्यों पूरी दुनिया की निगाहें ट्रंप और शी चिनफिंग की मुलाकात पर टिकी हुई हैं, जबकि भारत के भीतर मीडिया और राजनीतिक विमर्श कहीं और भटका हुआ दिखाई देता है.


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श्रवण गर्ग | अगर होसबोले जैसा नेता पाकिस्तान से रिश्ते सुधारने की बात कर रहा है, तो इसे केवल निजी राय नहीं माना जा सकता

हरकारा डीप डाइव के इस विस्तृत इंटरव्यू में वरिष्ठ पत्रकार निधीश त्यागी और वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग ने आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले के हालिया बयान, भारत-पाकिस्तान संबंधों, संघ की राजनीति, विदेश नीति और भारतीय मुसलमानों की स्थिति पर गंभीर चर्चा की.

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श्रवण गर्ग | चोर से कह रहे हैं चोरी कर और साहूकार से कह रहे हैं जागता रह

हरकारा डीप डाइव के इस लाइव इंटरव्यू में वरिष्ठ पत्रकार नितीश त्यागी और वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया सार्वजनिक आह्वानों, आर्थिक संकट, खाड़ी युद्ध, कोविड मॉडल, चुनावी राजनीति और भारतीय लोकतंत्र की दिशा पर गहराई से चर्चा की. बातचीत की शुरुआत प्रधानमंत्री द्वारा नागरिकों से “सोना कम खरीदने”, “वर्क फ्रॉम होम करने”, “पेट्रोल-डीजल की खपत घटाने” और “खर्च कम करने” की अपील से होती है.

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श्रवण गर्ग | पूरा देश एक हाईजैक हुए विमान की तरह है, और बंदूक कुछ लोगों के हाथ में है

हरकारा डीप डाइव के इस लाइव इंटरव्यू में वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग के साथ लोकतंत्र, चुनावी वैधता और विपक्ष की रणनीति पर चर्चा हुई. बातचीत की शुरुआत पराकला प्रभाकर के उस लेख से हुई, जिसमें उन्होंने सवाल उठाया था कि अगर विपक्ष चुनावी प्रक्रिया को “अवैध” और “लूटा हुआ” मानता है, तो फिर उसी प्रक्रिया में लगातार हिस्सा लेने का औचित्य क्या है.


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श्रवण गर्ग | बंगाल चुनाव: ‘अमित शाह का दांव’ और ममता की हार के संकेत 

हरकारा डीप डाइव के इस लाइव इंटरव्यू में वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग के साथ पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों और उनके व्यापक राजनीतिक असर पर चर्चा हुई. शुरुआती विश्लेषण में यह स्पष्ट किया गया कि यह चुनाव सिर्फ भाजपा बनाम टीएमसी नहीं, बल्कि सीधे तौर पर ‘अमित शाह बनाम ममता बनर्जी’ का मुकाबला बन गया था, जिसमें बढ़त भाजपा के पक्ष में जाती दिख रही है.

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श्रवण गर्ग | मोदी के डर से मुक्त होने का क्या यही सबसे अच्छा अवसर नहीं है ?

वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग के इस विस्तृत राजनीतिक विश्लेषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इर्द-गिर्द बने प्रभावशाली तंत्र, उनकी छवि के ‘कल्ट’ में बदलने और उसके सामाजिक-राजनीतिक असर की गहराई से पड़ताल की गई है. लेख में यह सवाल उठाया गया है कि क्या देश की राजनीति एक व्यक्ति केंद्रित विमर्श में सिमटती जा रही है और इसका लोकतंत्र पर क्या प्रभाव पड़ता है. साथ ही, विपक्ष की रणनीति, जनता के मनोविज्ञान, डर की राजनीति और सत्ता के केंद्रीकरण जैसे मुद्दों पर गंभीर चर्चा की गई है. लेख पाठकों को यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या यह समय डर से मुक्त होकर लोकतांत्रिक मूल्यों को पुनः स्थापित करने का सबसे उपयुक्त अवसर है.

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