बंगाल में भाजपा की सरकार बनते ही ‘जेयू’ में आरएसएस की शाखा शुरू, राज्य का पहला विवि परिसर

पश्चिम बंगाल में पहली बार भाजपा की सरकार बनते ही आरएसएस ने मंगलवार को जादवपुर विश्वविद्यालय (जेयू) में एक 'शाखा' शुरू की, जिसमें इसके कुछ सदस्यों ने घोषणा की कि वे कैंपस से “माओवाद को जड़ से उखाड़ फेंकेंगे.”

‘द टेलीग्राफ’ में शुभंकर चौधरी ने बताया है कि विश्वविद्यालय के कर्मचारियों का एक समूह सुबह करीब 6:30 बजे फुटबॉल मैदान में इकट्ठा हुआ, शपथ ली और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की शाखा के शुभारंभ के अवसर पर शारीरिक व्यायाम किया. भौतिकी विभाग के एक वरिष्ठ प्रयोगशाला परिचारक पलाश माझी ने कहा, "जादवपुर विश्वविद्यालय की स्थापना ऋषि अरबिंदो के मार्गदर्शन में राष्ट्रवाद के मंत्र पर हुई थी. लेकिन पिछले कुछ वर्षों में, विश्वविद्यालय उस रास्ते से भटक गया और नक्सली गतिविधियों तथा माओवाद में डूब गया. हमें इस माओवाद को जड़ से उखाड़ना है.”

शाखा का नेतृत्व कर रहे माझी ने आगे कहा, "हमने उन नक्सली तत्वों को हटाने का संकल्प लिया है जिनकी वजह से जेयू की बदनामी हुई है. हमें कैंपस को बचाना है. बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण से पहले एक चुनावी रैली के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जेयू को "राष्ट्रविरोधी नारों" का केंद्र बताया था.

मंगलवार की ड्रिल 'ब्लू अर्थ' वर्कशॉप के सामने आयोजित की गई थी, जो अपनी लेथ और मैकेनिकल कार्य सुविधाओं के लिए जानी जाती है. आरएसएस शाखा की योजना हर सुबह परिसर में एक घंटे की सभा आयोजित करने की है. माझी ने कहा कि शारीरिक अभ्यास में जल्द ही "दंड प्रयोग" या लाठी खेल शामिल होगा, जो आरएसएस प्रशिक्षण शिविरों की एक नियमित विशेषता है.

माझी ने गर्व के साथ कहा कि जेयू बंगाल का पहला विश्वविद्यालय परिसर है जहाँ आरएसएस ने औपचारिक रूप से शाखा शुरू की है. जेयू अक्सर अपनी राजनीतिक गतिविधियों, भित्तिचित्रों और विरोध के नारों को लेकर दक्षिणपंथी समूहों की आलोचना का पात्र रहा है.

इससे पहले कैंपस की दीवारों पर "आज़ाद कश्मीर" और "स्टॉप ऑपरेशन कगार" जैसे नारे दिखाई दिए थे—'ऑपरेशन कगार' 2022-23 में छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा पर केंद्र के तीव्र माओवाद विरोधी अभियानों के संदर्भ में था. विरोध के बाद विश्वविद्यालय ने "आज़ाद कश्मीर" के नारे पर सफेदी पुतवा दी थी और दूसरे नारे पर काला रंग फेर दिया था.

नाम न छापने की शर्त पर जेयू के एक प्रोफेसर ने कहा कि विधानसभा चुनाव में भाजपा के मजबूत प्रदर्शन ने आरएसएस समर्थकों को कैंपस में खुद को स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया है. लेकिन, वामपंथी छात्र समूहों ने इस कदम की कड़ी आलोचना की है.

जेयू में अति-वामपंथी 'रिवोल्यूशनरी स्टूडेंट्स फ्रंट' के यूनिट अध्यक्ष इंद्रानुज रे ने कहा: "आरएसएस कैंपस से वामपंथ को खत्म करना चाहता है, क्योंकि वे उन लोगों को बर्दाश्त नहीं कर सकते जो उनके विभाजनकारी एजेंडे पर सवाल उठाते हैं. वे छात्रों को डराने की कोशिश कर रहे हैं. हम उनसे वैचारिक और संगठनात्मक रूप से लड़ेंगे."

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