‘अगर मुझे यह पसंद नहीं आया, तो हम फिर से उनके सिर पर बम गिराना शुरू कर देंगे’: ट्रंप ने कहा ईरान समझौता अंतिम नहीं

‘रॉयटर्स’ के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि ईरान पर हुआ समझौता ज्ञापन (एमओयू) अंतिम नहीं है, और यदि उन्हें यह पसंद नहीं आया तो वे फिर से बमबारी का अभियान शुरू कर सकते हैं.

फ्रांस में जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने कहा, "यह एक समझौता ज्ञापन है. और अगर मुझे यह पसंद नहीं आया, तो हम फिर से उन पर गोलियां चलाना और उनके सिर पर बम गिराना शुरू कर देंगे. अगर मुझे यह पसंद नहीं आया, अगर वे सीधे होकर नहीं रहे, तो हम फिर से ठीक उनके सिर के बीचों-बीच बम गिराना शुरू कर देंगे, ठीक है?" ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान के इस समझौता ज्ञापन में उसे प्रतिबंधों से तुरंत कोई राहत नहीं दी गई है, साथ ही उन्होंने जोड़ा कि वे इस मामले पर बाद में बात करेंगे.

युद्ध को समाप्त करने के लिए अमेरिका के साथ एक अस्थायी समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए तुरंत कदम उठाएगा और उसे बिना किसी प्रतिबंध के अपना तेल बेचने की अनुमति दी जाएगी. यह जानकारी एक अंतरिम समझौते की लीक हुई प्रतियों के अनुसार सामने आई है, जिसके बारे में अधिकारियों का कहना है कि यह मुख्य दस्तावेज़ से काफी हद तक मेल खाती है. इस समझौते पर शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में एक समारोह के दौरान औपचारिक रूप से हस्ताक्षर होने हैं.

ईरान को तुरंत अपना तेल स्वतंत्र रूप से बेचने की अनुमति देने और अंततः सभी प्रतिबंधों को हटाने का अमेरिकी प्रस्ताव एक बहुत बड़ी रियायत है. ये रियायतें ईरान के साथ 2015 में हुए परमाणु समझौते की शर्तों से भी कहीं आगे जाती हैं, जिससे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में अमेरिका को एकतरफा अलग कर लिया था और इसे "अब तक का सबसे खराब समझौता" करार दिया था.

‘रॉयटर्स और एपी’ के मुताबिक, इस नए समझौते की वाशिंगटन में तीखी आलोचना होने की संभावना है — और यह इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए एक बड़ा झटका लग रहा है, जिन्होंने 28 फरवरी को ट्रंप के साथ मिलकर इस युद्ध की शुरुआत की थी.

इस समझौते में इजरायल और ईरान समर्थित मिलिशिया हिजबुल्लाह के बीच लेबनान में चल रही सभी लड़ाइयों को तुरंत समाप्त करने का आव्हान किया गया है. यह इस समझौते के सबसे संवेदनशील हिस्सों में से एक है क्योंकि इजरायल का रुख रहा है कि वह अपनी रक्षा करना जारी रखेगा और लेबनान के बड़े हिस्सों पर अपना कब्जा बनाए रखेगा. दूसरी ओर, ईरान ने कहा है कि समझौते के तहत इजरायल को पीछे हटना होगा, हालांकि लीक हुए संस्करणों में पीछे हटने का कोई जिक्र नहीं है.

दोनों पक्षों को एक अंतिम समझौते पर 60 दिनों की बातचीत शुरू करनी है, जिसके बारे में ट्रंप प्रशासन का जोर है कि यह ईरान को कभी भी परमाणु हथियार विकसित करने से रोकेगा। अमेरिकी प्रस्तावों का उद्देश्य ईरान को समझौते के लिए राजी करना प्रतीत होता है.

लेकिन इस बीच, ऐसा लगता है कि ईरान बिना कोई बड़ी रियायत दिए शुरुआत में ही सारे लाभ उठा रहा है. इस समझौते का अधिकांश हिस्सा युद्ध से पहले की स्थिति को बहाल करेगा, जिसमें शत्रुता को समाप्त करना और जलडमरूमध्य को फिर से खोलना शामिल है. मंगलवार को रॉयटर्स ने खबर दी थी कि अमेरिका-ईरान रूपरेखा समझौते में ईरान में निवेश को बढ़ावा देने के लिए 300 अरब डॉलर के एक निजी फंड की रूपरेखा तैयार की गई है. इस समझौते की सीधी जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने बताया कि इस राशि का आधे से अधिक हिस्सा पहले ही प्रतिबद्ध किया जा चुका है.

सूत्र ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस फंड को दोनों पक्षों को अंतिम समझौते पर पहुंचने के लिए एक आर्थिक प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है, क्योंकि वाशिंगटन और तेहरान शुक्रवार को हस्ताक्षर करने की तैयारी कर रहे हैं और इस योजना की अभी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है.

सूत्र ने स्पष्ट किया कि यह नया फंड एक निजी निवेश माध्यम है, न कि कोई पुनर्निर्माण या युद्ध के नुकसान की भरपाई का कार्यक्रम. इसमें सरकार का कोई पैसा या अनुदान शामिल नहीं होगा. उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका, खाड़ी अरब देशों, एशिया, दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका की कंपनियों ने इसके लिए वित्तीय मदद देने की सहमति जताई है.

इससे पहले एक वरिष्ठ ईरानी सूत्र ने रॉयटर्स को बताया था कि तेहरान ने शुरुआत में अमेरिका से युद्ध के नुकसान के मुआवजे के रूप में 400 अरब डॉलर की मांग की थी, लेकिन वाशिंगटन ने इसे देने से इनकार कर दिया था. इसके बाद इस फंड का विचार सामने आया, जिसे 'पुनर्निर्माण और विकास कोष' नाम दिया जाना है.

सूत्र ने बताया कि यह निवेश कोष अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाने और विदेशों में फ्रीज़ ईरानी संप्रभु संपत्तियों को मुक्त करने की समानांतर बातचीत से पूरी तरह अलग है. उन्होंने इन दोनों को अलग-अलग उद्देश्यों और समयसीमा वाले वित्तीय तंत्र के रूप में वर्णित किया.

ट्रंप की चेतावनी के बावजूद लेबनान में नेतन्याहू का हमला जारी

सरकारी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इजरायली सेना ने बुधवार को दक्षिणी लेबनान में नए हमले किए, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लेबनान में इजरायल के सैन्य अभियानों को लेकर फिर से आलोचना की थी.

लेबनान की राष्ट्रीय समाचार एजेंसी ने बताया कि इजरायली युद्धक विमानों ने नबातियेह अल-फौका क्षेत्र के साथ-साथ नजदीकी कफ़र तेबनित के बाहरी इलाकों को निशाना बनाया. इजरायली सेना की ओर से इस पर तुरंत कोई टिप्पणी नहीं आई है, जिसने पहले कहा था कि उसके अभियान ईरान समर्थित हिजबुल्लाह आंदोलन के खिलाफ हैं.

ट्रंप ने कहा, "अमेरिका के बिना इजरायल का कोई अस्तित्व नहीं होता. मेरे बिना इजरायल का वजूद नहीं होता क्योंकि कोई भी अन्य राष्ट्रपति वह करने के लिए तैयार नहीं था जो मैंने किया. बीबी (नेतन्याहू) के साथ मेरे बेहतरीन संबंध रहे हैं. लेकिन अब बीबी को लेबनान के मामले में अधिक जिम्मेदार होना पड़ेगा." 

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