खोया हुआ राजकुमार: क्या पार्टी और उसके नेता के बीच आ गए अभिषेक बनर्जी?
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के चुनावी व संगठनात्मक पतन के लिए केवल अभिषेक बनर्जी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, लेकिन उनके कॉर्पोरेट और भावनाहीन दृष्टिकोण ने पार्टी को भारी नुकसान पहुँचाया है. लेख में अभिषेक बनर्जी के बचपन के 'बदले के संकल्प' से लेकर, रुजिरा नरूला से थाईलैंड कनेक्शन वाली हाई-प्रोफाइल शादी, प्रशांत किशोर की आई-पैक (I-PAC) टीम के माध्यम से जमीनी नेताओं पर तकनीकी सर्विलांस और 2016 के कार हादसे के बाद ममता बनर्जी के सुरक्षात्मक रवैये का पूरा ब्योरा दिया गया है. जानिए कैसे 2026 के चुनावों में 74 विधायकों के टिकट काटने की अभिषेक की जिद ने सुवेंदु अधिकारी जैसे जननेताओं के विद्रोह के बाद टीएमसी को बिखराव की कगार पर खड़ा कर दिया.
ताश के पत्तों की तरह क्यों बिखर रही है तृणमूल कांग्रेस?
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) अपने अस्तित्व के सबसे बड़े संकट से गुजर रही है. पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली से नाराज होकर 28 में से करीब 20 लोकसभा सांसदों के भाजपा नीत एनडीए (NDA) के पाले में जाने और विधायकों द्वारा रितब्रत बनर्जी को नया नेता प्रतिपक्ष चुनने से ममता बनर्जी के साम्राज्य में दरारें आ गई हैं. रिपोर्ट में चुनावी रणनीतिकारों (I-PAC) पर अत्यधिक निर्भरता, पुराने नेताओं की अनदेखी, यूसुफ पठान जैसे बाहरी चेहरों की 'पैराशूट राजनीति' और संगठन की अंदरूनी कमजोरी का विस्तृत विश्लेषण किया गया है.
अमित शाह पर चुनावी टिप्पणी मामले में अभिषेक बनर्जी के खिलाफ एफआईआर, गैर-जमानती धाराएं भी लगीं
तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के खिलाफ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर की गई टिप्पणी को लेकर एफआईआर दर्ज की गई है. राजीव सरकार की शिकायत पर बिधाननगर साइबर क्राइम पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की गैर-जमानती धाराओं में यह एक्शन लिया है. पढ़ें पूरी रिपोर्ट

