ज्ञानेश कुमार: बंगाल चुनाव गाथा का ‘अमिट दाग’ वाला चेहरा
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व वाले चुनाव आयोग ने 2026 के बंगाल चुनावों पर एक ऐसी अमिट छाप छोड़ी है, जैसी पहले शायद ही किसी चुनाव में देखी गई हो. चुनाव आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दूसरे दौर में महत्वपूर्ण बदलाव पेश किए, जिसमें बंगाल सहित 12 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश शामिल थे.
बंगाल: केंद्र के कर्मचारी ही कराएंगे वोटों की गिनती, सुप्रीम कोर्ट ने भी नहीं मानी टीएमसी की मांग
केंद्र सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों को मतगणना पर्यवेक्षकों और सहायकों के रूप में तैनात करने के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. शनिवार (2 मई 2026) को पार्टी की याचिका का निपटारा करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिका में अब किसी और आदेश की आवश्यकता नहीं है, सिवाय इसके कि 13 अप्रैल के चुनाव आयोग के सर्कुलर को पूरी तरह (अक्षरशः) लागू किया जाए.
ममता का गढ़ बनाम भाजपा का बड़ा दांव: क्या ‘एसआईआर’ पलटेगा संतुलन?
‘पीपल्स पल्स रिसर्च ऑर्गनाइजेशन’ द्वारा जमीनी स्थिति के सूक्ष्म अध्ययन से पता चलता है कि राजनीतिक माहौल मौजूदा सत्ताधारी ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के पक्ष में है.“साउथ फर्स्ट” में जी मुरली कृष्णा के अनुसार, प्रतियोगिता की रूपरेखा ही एक ‘असंतुलन’ को प्रकट करती है. जहाँ टीएमसी सभी 294 निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव लड़ रही है, वहीं मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी केवल 200 के आसपास सीटों पर चुनाव लड़ रही है. प्रभावी रूप से, यदि टीएमसी पूरे 100 अंकों की परीक्षा दे रही है, तो भाजपा केवल लगभग 65 अंकों की परीक्षा दे रही है.

