‘पूरी तरह से निंदनीय और खुल्लम-खुल्ला’: नटराजन का नामांकन खारिज होने पर कांग्रेस पहुंची चुनाव आयोग
असद रहमान की रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र खारिज होने का विवाद अब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पास पहुंच गया है. कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग को विस्तृत प्रतिवेदन सौंपकर रिटर्निंग ऑफिसर (RO) के आदेश को पूरी तरह गैर-कानूनी बताया है. सिंघवी ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 33ए (Section 33A of RP Act) और संविधान के अनुच्छेद 324 का हवाला देते हुए तर्क दिया कि जिस निजी शिकायत पर कोर्ट ने संज्ञान तक नहीं लिया और न ही आरोप तय हुए, उसे हलफनामे में छुपाने का आरोप बेबुनियाद है. चुनाव आयोग द्वारा कार्रवाई न होने पर कांग्रेस ने तत्काल अदालत जाने की चेतावनी दी है. पढ़ें पूरी रिपोर्ट.
राजेश चतुर्वेदी | जो जिस चुनाव चिन्ह पर जीतकर आया है, उसे दल बदलने से पहले इस्तीफा देकर जनता से नया जनादेश लेना चाहिए
‘हरकारा डीप डाइव’ के इस राजनीतिक एपिसोड में निधिश त्यागी और वरिष्ठ पत्रकार राजेश चतुर्वेदी ने मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र रद्द होने के बाद उपजे संवैधानिक और राजनीतिक संकट पर गहराई से चर्चा की है. विश्लेषण में बताया गया है कि कैसे एक अदालती समन को आधार बनाकर भाजपा ने आपत्ति दर्ज कराई और कांग्रेस की निश्चित मानी जा रही सीट को संकट में डाल दिया. झारखंड और मध्य प्रदेश में चुनाव आयोग के दोहरे रवैये के आरोपों, कांग्रेस द्वारा अपने विधायकों को चार्टर्ड प्लेन से भेजने की मजबूरी, तेलंगाना प्रभारी के रूप में नटराजन की अंदरूनी राजनीतिक घेराबंदी और 2014 के बाद देश में मजबूत हुई 'सैम-दाम-दंड-भेद' की राजनीति पर पढ़ें यह विस्तृत आलेख.
राज्यसभा चुनाव: मध्य प्रदेश से कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज
मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव में उस वक्त एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला जब कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र निर्वाचन अधिकारी (RO) द्वारा खारिज कर दिया गया. यह कार्रवाई भाजपा उम्मीदवार महेश केवट की उस आपत्ति के बाद की गई, जिसमें नटराजन पर तेलंगाना के एक मामले की जानकारी चुनावी हलफनामे में छुपाने का आरोप था. इस फैसले का मंत्री राकेश सिंह और कैलाश विजयवर्गीय सहित भाजपा नेताओं ने विधानसभा में जश्न मनाया. दूसरी ओर, कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा व हरीश चौधरी ने इसे तकनीकी रूप से गलत बताते हुए स्पष्ट किया कि नटराजन पर कोई एफआईआर नहीं बल्कि सिर्फ एक नोटिस था, जिसे छुपाया नहीं गया. इस राजनीतिक विवाद और कांग्रेस के अदालत जाने के फैसले पर पढ़ें पूरी रिपोर्ट.

