राजेश चतुर्वेदी | जो जिस चुनाव चिन्ह पर जीतकर आया है, उसे दल बदलने से पहले इस्तीफा देकर जनता से नया जनादेश लेना चाहिए
हरकारा डीप डाइव के इस एपिसोड में निधिश त्यागी ने वरिष्ठ पत्रकार राजेश चतुर्वेदी के साथ मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किए जाने के विवाद पर चर्चा की. बातचीत में चुनाव आयोग की भूमिका, भाजपा की राजनीतिक रणनीति, कांग्रेस की कमजोरियों और लोकतंत्र पर पड़ने वाले प्रभावों को केंद्र में रखा गया.
राजेश चतुर्वेदी ने बताया कि मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों पर चुनाव होना था, जिनमें संख्या बल के आधार पर दो सीटें भाजपा और एक सीट कांग्रेस को मिलनी तय मानी जा रही थी. लेकिन मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद कांग्रेस की एकमात्र संभावित सीट भी खतरे में पड़ गई. कांग्रेस का आरोप है कि उन्हें स्पष्टीकरण देने का अवसर दिए बिना नामांकन खारिज कर दिया गया, जबकि झारखंड में इसी तरह के मामले में उम्मीदवार को जवाब देने का समय दिया गया.
विवाद की जड़ एक ऐसे न्यायिक समन को बताया गया है जिसका उल्लेख नामांकन पत्र में नहीं किया गया था. कांग्रेस का कहना है कि यह कोई आपराधिक मामला या एफआईआर नहीं थी, जबकि भाजपा इसे महत्वपूर्ण जानकारी छिपाने का मामला बता रही है. इसी मुद्दे पर कांग्रेस चुनाव आयोग और अदालत का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रही है.
चर्चा में यह भी कहा गया कि 2014 के बाद भारतीय राजनीति में सत्ता हासिल करने और उसे हर हाल में बनाए रखने की प्रवृत्ति मजबूत हुई है. बंगाल, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश जैसे उदाहरणों का हवाला देते हुए दल-बदल, क्रॉस वोटिंग और विपक्षी दलों के विधायकों को अपने पक्ष में करने की राजनीति पर सवाल उठाए गए.
राजेश चतुर्वेदी ने कांग्रेस की रणनीति पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि यदि पार्टी को अपने विधायकों पर पूरा भरोसा था तो उन्हें विशेष विमान से दूसरे राज्यों में भेजने की जरूरत क्यों पड़ी. इससे यह संकेत मिलता है कि कांग्रेस को भी टूट-फूट और क्रॉस वोटिंग का डर था.
बातचीत में तेलंगाना का भी जिक्र आया, जहां मीनाक्षी नटराजन कांग्रेस की प्रभारी हैं. इस पर चर्चा हुई कि उनके खिलाफ इस्तेमाल की गई जानकारी भाजपा तक कैसे पहुंची और क्या इसके पीछे कांग्रेस की आंतरिक राजनीति की भी कोई भूमिका हो सकती है.
एपिसोड का निष्कर्ष यह रहा कि मीनाक्षी नटराजन का मामला केवल एक राज्यसभा सीट का विवाद नहीं है. यह चुनाव आयोग की निष्पक्षता, दल-बदल की राजनीति, जनादेश के सम्मान और भारतीय लोकतंत्र की संस्थाओं पर बढ़ते सवालों से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है. राजेश चतुर्वेदी और निधिश त्यागी ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए केवल चुनाव कराना ही नहीं, बल्कि पूरी प्रक्रिया का निष्पक्ष और भरोसेमंद होना भी उतना ही जरूरी है. पूरी बातचीत यहाँ सुन सकते हैं.

