मोदी का ‘विपक्ष-मुक्त’ भारत: दिल्ली दरबार ने बंगाल में सत्ता परिवर्तन की पटकथा कैसे रची
वरिष्ठ पत्रकार पी. रमन ने 'द वायर' में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव परिणामों का तीखा विश्लेषण किया है. उन्होंने बताया कि कैसे 2.5 लाख केंद्रीय बलों की तैनाती, गोदी मीडिया की चुप्पी और सुवेन्दु अधिकारी के नेतृत्व में बंगाल अब पूरी तरह दिल्ली (अमित शाह) के अधीन हो गया है. पढ़ें अनुदित सारांश.
अरुण श्रीवास्तव | "बंगाल के पुनर्जागरण" की कहानी के ज़रिए चुनावी हेरफेर को सही ठहराने की भाजपा की कोशिश
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक राष्ट्रीय अंग्रेज़ी दैनिक में छपे एक लेख में, बंगाल की 'सभ्यतागत नींद' के रूप में बताई गई स्थिति पर चिंता ज़ाहिर की. उन्होंने कविगुरु रवींद्रनाथ ठाकुर का ज़िक्र किया. "हे नूतन, देखा दिक आरबार, जन्मेर प्रोथोमो शुभोक्खोन" . और सच्ची बंगाली विरासत की महानता को वापस लाने के भाजपा के मिशन को दोहराया. यह लेख उस दिन छपा था जब भाजपा ने भारत के राजनीतिक इतिहास में पहली बार बंगाल की सत्ता पर क़ब्ज़ा किया था.
सुवेंदु अधिकारी: अवसरवाद, आरोप और सत्ता की भूख से बना 'नेता'
सुवेंदु अधिकारी की कहानी किसी आदर्शवादी नेता की नहीं, बल्कि एक ऐसे राजनीतिक खिलाड़ी की है जिसने हर पार्टी, हर विचारधारा और हर गठबंधन का इस्तेमाल केवल अपनी महत्वाकांक्षा की सीढ़ी के रूप में किया. कांग्रेस से तृणमूल, तृणमूल से भाजपा . यह महज़ एक राजनीतिक यात्रा नहीं है, यह अवसरवाद की पाठ्यपुस्तक है.

