‘लाखों मतदाताओं का छूटना हमारे लोकतंत्र पर कलंक है’: पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओम प्रकाश रावत ने चुनाव आयोग (ईसीआई) की कार्यप्रणाली, मतदाता सूचियों में गड़बड़ी और चुनावी निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए हैं. ‘द वायर’ के एमके वेणु को दिए इंटरव्यू में रावत ने कहा कि जिस बड़े पैमाने पर लाखों पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से गायब पाए जा रहे हैं, वह "हमारे लोकतंत्र पर एक बड़ा कलंक" है. उन्होंने जोर देकर कहा कि चुनाव आयोग की यह प्राथमिक जिम्मेदारी है कि वह सुनिश्चित करे कि हर पात्र नागरिक का नाम सूची में हो और वह वोट दे सके. यदि लाखों लोग मतदान के अधिकार से वंचित रह जाते हैं, तो यह चुनाव की शुचिता पर सवाल खड़ा करता है.
ममता का गढ़ बनाम भाजपा का बड़ा दांव: क्या ‘एसआईआर’ पलटेगा संतुलन?
‘पीपल्स पल्स रिसर्च ऑर्गनाइजेशन’ द्वारा जमीनी स्थिति के सूक्ष्म अध्ययन से पता चलता है कि राजनीतिक माहौल मौजूदा सत्ताधारी ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के पक्ष में है.“साउथ फर्स्ट” में जी मुरली कृष्णा के अनुसार, प्रतियोगिता की रूपरेखा ही एक ‘असंतुलन’ को प्रकट करती है. जहाँ टीएमसी सभी 294 निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव लड़ रही है, वहीं मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी केवल 200 के आसपास सीटों पर चुनाव लड़ रही है. प्रभावी रूप से, यदि टीएमसी पूरे 100 अंकों की परीक्षा दे रही है, तो भाजपा केवल लगभग 65 अंकों की परीक्षा दे रही है.
जब मतदाता ही गुम हो जाए: बंगाल चुनाव में लोकतंत्र का अनकहा संकट
आज टॉकिंग न्यूज़ विद निधीश के लाइव शो में पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर गंभीर मुद्दों पर चर्चा की गई. शो में वरिष्ठ पत्रकार राजेश चतुर्वेदी भी शामिल हुए. बातचीत में सामने आया कि इस बार चुनाव में सबसे बड़ा सवाल खुद मतदाता को लेकर खड़ा हो गया है. बताया गया कि करीब 90–91 लाख यानी लगभग हर दसवां मतदाता वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है, जिसके कारण बड़ी संख्या में लोग मतदान से बाहर हो सकते हैं.

