बंगाल में भाजपा की जीत के बाद बांग्लादेशी विदेश मंत्री ने बंगाली भाषी मुसलमानों के ‘पुश-इन’ के खिलाफ चेताया

‘मकतूब मीडिया’ के मुताबिक, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के ऐतिहासिक बहुमत हासिल करने के एक दिन बाद, बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने चेतावनी दी है कि यदि राज्य में नई सरकार के तहत "पुश-इन" (सीमा पार धकेलने) की घटनाएं बढ़ती हैं, तो ढाका इसका जवाब देगा.

अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक के बाद ढाका के राजकीय अतिथि गृह 'पद्मा' में पत्रकारों को जानकारी देते हुए खलीलुर रहमान ने कहा, "अगर पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद किसी भी तरह की 'पुश-इन' की घटना होती है, तो बांग्लादेश उचित कदम उठाएगा. " बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के आधिकारिक फेसबुक पेज ने भी मंगलवार को रहमान के इस बयान को साझा किया.

"पुश-इन" शब्द, जिसे भारत में "पुशबैक" कहा जाता है, उस प्रक्रिया को दर्शाता है, जिसमें भारतीय सीमा बल कथित तौर पर लोगों को भारत-बांग्लादेश सीमा पार कराकर जबरन बांग्लादेशी क्षेत्र में धकेल देते हैं. भारत सरकार बंगाली भाषी मुसलमानों के खिलाफ व्यवस्थित पूर्वाग्रह के आरोपों को लेकर सवालों के घेरे में रही है, जिन्हें अक्सर बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के "बांग्लादेशी घुसपैठिया" करार दिया जाता है.

वर्षों से, भारत के सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष उठाए गए मामलों सहित कई आरोपों में सुरक्षाकर्मियों पर दस्तावेजों के बावजूद बंगाली मुसलमानों को बांग्लादेशी नागरिक बताकर निशाना बनाने और उन्हें सीमा पार निष्कासित करने का आरोप लगाया गया है.

ढाका की ये चिंताएं पश्चिम बंगाल में भाजपा के आक्रामक चुनावी भाषणों के बीच आई हैं, जहां पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने बार-बार "बांग्लादेशी घुसपैठियों" का मुद्दा उठाया. पश्चिम बंगाल में भाजपा के नेता और जीत के बाद अगले मुख्यमंत्री बनने की प्रबल संभावना वाले सुवेन्दु अधिकारी ने अपने चुनावी भाषणों और सार्वजनिक बयानों का केंद्र कथित अवैध बांग्लादेशी घुसपैठ को बनाया, जिसमें वे अक्सर "बांग्लादेशी मुस्लिम घुसपैठियों" और रोहिंग्या प्रवासियों का जिक्र करते रहे.

जुलाई 2025 में सुवेन्दु अधिकारी ने घोषणा की थी, "सबसे पहले, इन रोहिंग्याओं और बांग्लादेशी मुस्लिम घुसपैठियों को मतदाता सूची से हटाया जाना चाहिए. फिर उन्हें देश से बाहर निकाला जाना चाहिए... एक भी रोहिंग्या या बांग्लादेशी मुस्लिम घुसपैठिया यहां नहीं रहेगा. यह हमारी प्रतिबद्धता है." उन्होंने दावा किया था कि पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची में करीब 1 करोड़ "रोहिंग्या प्रवासी, बांग्लादेशी मुस्लिम मतदाता, मृत, डुप्लिकेट और फर्जी मतदाता" हैं और उन्होंने बिहार की तरह उन्हें हटाने के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की मांग की थी. उनकी चेतावनी थी कि कार्रवाई के बिना, घुसपैठ के कारण होने वाले जनसांख्यिकीय परिवर्तनों से पश्चिम बंगाल "वृहद बांग्लादेश" या "पश्चिम बांग्लादेश" में बदल सकता है.

उल्लेखनीय है कि दिसंबर 2025 में अधिकारी ने कोलकाता में बांग्लादेश उप उच्चायोग तक एक विरोध मार्च का नेतृत्व किया था, जहां उन्होंने घोषणा की थी कि बांग्लादेश को "वैसा ही सबक सिखाया जाना चाहिए जैसा इजराइल ने गाजा को सिखाया" और भारत में राजनयिक मिशन के कामकाज में बाधा डालने की धमकी दी थी.

भाजपा का अभियान मतदाता सूची के विवादास्पद एसआईआर के साथ भी मेल खाता है, जिसके माध्यम से लगभग 90 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए. हटाए गए लोगों में से लगभग एक-तिहाई मुसलमान हैं. असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा, जिन्होंने सुवेन्दु के साथ प्रचार किया, ने भी कथित घुसपैठियों और मियां मुसलमानों को सीमा पार धकेलने के बारे में सार्वजनिक रूप से बयानबाजी की है.

अधिकारी और सरमा द्वारा की गई टिप्पणियों के संबंध में ढाका में पूछे गए सवालों के जवाब में रहमान ने कहा कि बांग्लादेश अतीत में भी ऐसे बयानों का विरोध कर चुका है और आवश्यक राजनयिक उपाय करना जारी रखेगा. बांग्लादेश ने सरमा की टिप्पणियों पर 30 अप्रैल को भारत के कार्यवाहक उच्चायुक्त पवन बढ़े को विदेश मंत्रालय में तलब किया था और ऐसे बयानों को "प्रतिकूल" बताते हुए भारतीय राजनीतिक नेताओं से संवेदनशील द्विपक्षीय मामलों पर संयम बरतने का आग्रह किया था. सत्ता संभालने के बाद से नई बीएनपी-नेतृत्व वाली सरकार द्वारा दर्ज किया गया यह पहला औपचारिक विरोध था.

रहमान ने दोनों देशों के बीच लंबे समय से लंबित तीस्ता जल बंटवारे के विवाद पर भी बात की. प्रस्तावित तीस्ता समझौता 2011 से रुका हुआ है, जब तत्कालीन पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस समझौते का विरोध करते हुए तर्क दिया था कि इससे राज्य के किसानों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा. यह पूछे जाने पर कि क्या पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत तीस्ता संधि पर बातचीत को पुनर्जीवित कर सकती है, रहमान ने कहा कि नई सरकार द्वारा अपनी स्थिति स्पष्ट करने से पहले अटकलें लगाना जल्दबाजी होगी. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि तीस्ता नदी के किनारे रहने वाले समुदाय गंभीर पारिस्थितिक और आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं और बांग्लादेश अपने लोगों के हित में सभी उपलब्ध विकल्पों पर विचार करेगा.

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