पश्चिम बंगाल में रिकॉर्ड 92% मतदान, लेकिन वजह बनी घटती मतदाता संख्या
पश्चिम बंगाल में हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में करीब 92% मतदान दर्ज किया गया, जो राज्य के चुनावी इतिहास में अब तक का सबसे अधिक है. यह आंकड़ा चुनाव आयोग द्वारा जारी अस्थायी आंकड़ों पर आधारित है. हालांकि, द हिन्दू की रिपोर्ट के अनुसार यह रिकॉर्ड मतदान दर वास्तव में वोटिंग में बड़ी बढ़ोतरी के कारण नहीं, बल्कि मतदाताओं की कुल संख्या घटने की वजह से सामने आई है.
दरअसल, चुनाव से पहले हुए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के कारण मतदाता सूची में बड़ी कटौती हुई. इस प्रक्रिया में राज्य के कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 11% घटकर 7.66 करोड़ से 6.26 करोड़ रह गई. यह प्रक्रिया काफी विवादित रही है. इसी तरह 2021 के विधानसभा चुनाव में जहां 7.34 करोड़ मतदाता थे, वहीं हालिया चुनाव में यह संख्या घटकर 6.82 करोड़ रह गई, यानी करीब 7% की कमी आई है.
हालांकि मतदाताओं की संख्या कम हुई, लेकिन वोट डालने वालों की संख्या में केवल 3.6% की ही बढ़ोतरी हुई, जो पिछले दस विधानसभा चुनावों में सबसे कम वृद्धि मानी जा रही है. इससे यह संकेत मिलता है कि कई ऐसे लोग, जो वोट डाल सकते थे, एसआईआर के दौरान सूची से हटाए जाने के कारण मतदान नहीं कर पाए.
अगर 2001 से अब तक के आंकड़ों को देखें, तो पिछली बार एसआईआर 2001 के बाद हुआ था, जिसके चलते 2006 के चुनाव में मतदाताओं की संख्या 1% कम हो गई थी, लेकिन उस समय वोट डालने वालों की संख्या में 7.7% की बढ़ोतरी देखी गई थी.
क्षेत्रवार विश्लेषण में पाया गया कि राज्य की 294 में से 242 विधानसभा सीटों पर वोट डालने वालों की संख्या 2021 के मुकाबले बढ़ी, जबकि 52 सीटों पर इसमें गिरावट आई. जिन क्षेत्रों में बढ़ोतरी हुई, वे मुख्य रूप से उत्तर और दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र में केंद्रित थे. चांचल, डोमकल और सितालकुची जैसे क्षेत्रों में लगभग 29,000 तक अधिक लोगों ने मतदान किया.
वहीं दूसरी ओर, दक्षिणी डेल्टा और कुछ उत्तरी क्षेत्रों में गिरावट देखी गई है. समसेरगंज, मेटियाब्रुज और हावड़ा उत्तर जैसी सीटों पर क्रमशः करीब 33,500, 24,000 और 19,000 कम लोगों ने वोट डाला, जो 2021 की तुलना में कमी दर्शाता है.
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि जिन सीटों पर एसआई आर के दौरान सबसे ज़्यादा मतदाता हटाए गए, वहीं मतदान प्रतिशत में सबसे ज़्यादा बढ़ोतरी दर्ज हुई है. उदाहरण के लिए, चौरंगी और जोरासांको सीटों पर लगभग 40% मतदाता सूची से हटाए गए थे, लेकिन वहां मतदान प्रतिशत करीब 86% रहा, जो 2021 के मुकाबले कम से कम 33 प्रतिशत अधिक है. इसी तरह समसेरगंज, हावड़ा उत्तर और कोलकाता पोर्ट जैसे क्षेत्रों में भी 30% से अधिक मतदाता हटाए गए और वहां भी इसी तरह का ट्रेंड देखा गया.
इसके उलट, जहां मतदाता सूची में कम कटौती हुई, जैसे कटुलपुर, भगवानपुर और साबंग, वहां मतदान प्रतिशत 90% से अधिक रहा, लेकिन इसमें 2021 के मुकाबले केवल 5 प्रतिशत अंक से भी कम की बढ़ोतरी हुई. इसका मतलब है कि इन क्षेत्रों में पहले से ही अधिक संख्या में लोग मतदान करते रहे हैं.
क्षेत्रीय स्तर पर देखा जाए तो दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र, जिसमें 294 में से 117 सीटें आती हैं, वहां लगभग सभी सीटों पर वोट डालने वालों की संख्या बढ़ी है. इसके बाद उत्तरी क्षेत्र रहा, जहां 54 में से 48 सीटों पर बढ़ोतरी देखी गई है. वहीं ग्रेटर कोलकाता क्षेत्र, जो शहरी इलाकों से बना है, वहां कई सीटों पर वोट डालने वालों की कुल संख्या में कमी दर्ज की गई.

