पश्चिम बंगाल में रिकॉर्ड 92% मतदान, लेकिन वजह बनी घटती मतदाता संख्या
चुनाव से पहले हुए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के कारण मतदाता सूची में बड़ी कटौती हुई. इस प्रक्रिया में राज्य के कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 11% घटकर 7.66 करोड़ से 6.26 करोड़ रह गई. यह प्रक्रिया काफी विवादित रही है. इसी तरह 2021 के विधानसभा चुनाव में जहां 7.34 करोड़ मतदाता थे, वहीं हालिया चुनाव में यह संख्या घटकर 6.82 करोड़ रह गई, यानी करीब 7% की कमी आई है.हालांकि मतदाताओं की संख्या कम हुई, लेकिन वोट डालने वालों की संख्या में केवल 3.6% की ही बढ़ोतरी हुई, जो पिछले दस विधानसभा चुनावों में सबसे कम वृद्धि मानी जा रही है.
योगेंद्र यादव: पश्चिम बंगाल चुनाव में अल्पसंख्यकों को बाहर करने की साज़िश
इंडियन एक्सप्रेस के ओपिनियन कॉलम में स्वराज इंडिया के सदस्य और भारत जोड़ो अभियान के राष्ट्रीय संयोजक योगेंद्र यादव लिखते हैं कि पिछले 10 महीनों में पश्चिम बंगाल में ‘स्पेशल इम्पेडिमेंट रिमूवल’ (एसआईआर) के तहत बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाना एक सामान्य बात बन गई है. बंगाल का यह मामला मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने का एक असाधारण उदाहरण है.
“वोट देने के लिए भरोसा नहीं, लेकिन चुनाव कराने के लिए उन पर पूरा भरोसा है” : बंगाल के चुनाव अधिकारी जिनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए
जो सरकारी कर्मचारी दशकों से चुनाव ड्यूटी में तैनात होकर लोकतंत्र के इस महापर्व को संपन्न कराने में अपना योगदान देते रहे हैं, “एसआईआर” के बाद पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची से उन्हें बाहर कर दिया गया है. दुखद यह है कि कहीं उनकी सुनवाई नहीं हुई है. ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में अत्री मित्रा की यह रिपोर्ट मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर सवाल उठाती है. यह दिखाती है कि कैसे सिस्टम की खामियों के कारण स्वयं 'सिस्टम के रक्षक' (चुनाव अधिकारी) ही 2026 के विधानसभा चुनावों में लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित रह गए हैं.
बंगाल चुनाव में आलू का भी दर्द; भाजपा को क्यों दिख रही है उम्मीद
पश्चिम बंगाल के हुगली और बर्धमान जिलों में, जो राज्य की आलू अर्थव्यवस्था का केंद्र हैं, किसानों के बीच गहरी हताशा और अनिश्चितता का माहौल है. जिस आलू ने कभी इन क्षेत्रों को समृद्धि दी थी, वही आज बंपर पैदावार के कारण किसानों के लिए 'श्राप' बन गया है. कोलकाता से लगभग 130 किलोमीटर दूर, भतार विधानसभा सीट के छोर पर, आलू किसान एक चाय की दुकान पर बैठकर अपने अस्तित्व के संघर्ष पर चर्चा कर रहे थे. उन्हें उन एसयूवी की कोई परवाह नहीं थी जो हाईवे पर तेज़ी से गुज़र रही थीं—जिनमें से कुछ पर्यटकों को बीरभूम ले जा रही थीं और कुछ चुनाव आयोग के अधिकारियों को बंगाल में ड्यूटी पर.
जब मतदाता ही गुम हो जाए: बंगाल चुनाव में लोकतंत्र का अनकहा संकट
आज टॉकिंग न्यूज़ विद निधीश के लाइव शो में पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर गंभीर मुद्दों पर चर्चा की गई. शो में वरिष्ठ पत्रकार राजेश चतुर्वेदी भी शामिल हुए. बातचीत में सामने आया कि इस बार चुनाव में सबसे बड़ा सवाल खुद मतदाता को लेकर खड़ा हो गया है. बताया गया कि करीब 90–91 लाख यानी लगभग हर दसवां मतदाता वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है, जिसके कारण बड़ी संख्या में लोग मतदान से बाहर हो सकते हैं.

