अरावली समिति द्वारा ऑनलाइन सुझाव मांगे जाने का ग्रामीण हितधारक कैसे पालन करेंगे?
अक्सर सिस्टम अपने तरीके से काम करता है, चाहे फिर मसला कोई हो. अरावली से जुड़े मुद्दों पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित उच्चस्तरीय समिति (हाई पावर कमेटी) के एक हालिया कदम पर कार्यकर्ताओं, पर्यावरणविदों और आदिवासी समूहों ने चिंता जताई है. कारण यह है कि उच्चस्तरीय समिति ने इन मुद्दों पर विशिष्ट हितधारकों के साथ-साथ आम जनता से भी सुझाव आमंत्रित किए हैं, लेकिन शर्त यह रखी है कि इन्हें ईमेल या गूगल फॉर्म के माध्यम से भेजा जाए.
इसमें समस्या यह है कि अरावली पर्वत शृंखला से जुड़े फैसलों से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले ग्रामीण समुदायों द्वारा ऑनलाइन माध्यम से प्रभावी ढंग से अपनी बात या अभ्यावेदन रख पाने की संभावना बहुत कम है. ‘द वायर’ के अनुसार, कार्यकर्ताओं ने कहा कि समिति को सबसे पहले भौतिक (कागज़ी) नोटिस के जरिए सुझाव आमंत्रित करने चाहिए और उसके बाद जनता को अपने लिखित सुझाव भेजने के लिए 21 दिनों से अधिक का समय देना चाहिए.

