मंदिर विवाद से गाय की राजनीति तक, भंवर मेघवंशी ने क्या कहा? #harkara
हरकारा डीप डाइव के इस लाइव एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार निधीश त्यागी ने लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता भंवर मेघवंशी से राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के एक मंदिर विवाद और गाय की राजनीति पर बातचीत की. मेघवंशी ने दावा किया कि भीलवाड़ा के बराना गांव में सदियों पुराने एक लोकदेवता मंदिर का संचालन दलित पुजारी परिवार करता रहा है. उनके अनुसार, मंदिर के विकास और चढ़ावे में वृद्धि के बाद स्थानीय आरएसएस और भाजपा से जुड़े कुछ लोगों ने मंदिर प्रबंधन पर नियंत्रण की कोशिश की. उन्होंने आरोप लगाया कि एक ट्रस्ट बनाकर पुजारी परिवार के अधिकार सीमित किए गए और विरोध करने पर उनके साथ मारपीट भी हुई. चर्चा में यह सवाल उठाया गया कि जब संघ समरसता और हिंदू एकता की बात करता है, तो दलितों से जुड़े ऐसे विवाद क्यों सामने आते हैं. मेघवंशी ने कहा कि समरसता के दावे और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर दिखाई देता है. उनके मुताबिक, दलितों को बराबरी का दर्जा देने को लेकर समाज के भीतर अब भी प्रतिरोध मौजूद है. बातचीत में गाय की राजनीति पर भी चर्चा हुई. मेघवंशी ने आरोप लगाया कि गाय के नाम पर राजनीति तो होती है, लेकिन गौशालाओं और पशु संरक्षण के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं कराए जाते. उन्होंने कहा कि आवारा पशुओं और गायों की खराब स्थिति किसानों और ग्रामीण समाज के लिए बड़ी समस्या बन चुकी है. कार्यक्रम के अंत में दोनों वक्ताओं ने कहा कि मंदिर विवाद और गाय की राजनीति जैसे मुद्दे सामाजिक न्याय, जातिगत समानता और राजनीतिक दावों की वास्तविकता को समझने का अवसर देते हैं. इन घटनाओं से यह सवाल भी उठता है कि सामाजिक समरसता के दावों को जमीन पर कितना लागू किया जा रहा है.

