कोलकाता में बुलडोजर कार्रवाई से तनाव बढ़ा; उपद्रवियों के हाथ में भाजपा का झंडा और ‘जय श्री राम’ के नारे
कोलकाता के प्रतिष्ठित न्यू मार्केट इलाके में बुलडोजर द्वारा कई ढांचों को ढहाए जाने के बाद तनाव बढ़ गया. इसी तरह के दृश्य मुर्शिदाबाद के जियागंज में भी देखे गए, जहाँ एक भीड़ ने लेनिन की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त कर दिया. तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं पर लक्षित हमले का आरोप लगाया है.
बंगाल की 96 सीटों पर नज़र: इनमें से 48 में मतदान गिरा और एसआईआर के तहत 28% नाम हटाए गए
पश्चिम बंगाल चुनाव दो प्रमुख कारणों से चर्चा में रहे: पहला, 'तार्किक विसंगतियों' का एक नया मानदंड जिसके तहत मतदाता सूची से 27.16 लाख नाम हटा दिए गए, और दूसरा, 92.95% का रिकॉर्ड मतदान, जिसमें 2021 की तुलना में 31 लाख अधिक वोट पड़े.
बंगाल: केंद्र के कर्मचारी ही कराएंगे वोटों की गिनती, सुप्रीम कोर्ट ने भी नहीं मानी टीएमसी की मांग
केंद्र सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों को मतगणना पर्यवेक्षकों और सहायकों के रूप में तैनात करने के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. शनिवार (2 मई 2026) को पार्टी की याचिका का निपटारा करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिका में अब किसी और आदेश की आवश्यकता नहीं है, सिवाय इसके कि 13 अप्रैल के चुनाव आयोग के सर्कुलर को पूरी तरह (अक्षरशः) लागू किया जाए.
बंगाल के चुनावी रण में केंद्रीय बलों की ज्यादती के आरोप और राजनीतिक तनाव
खबरों के मुताबिक, केंद्रीय बल लोगों को पीट रहे थे और महिलाओं व बच्चों तक को नहीं छोड़ रहे थे. ममता बनर्जी ने कहा कि लाठीचार्ज की कई घटनाएं हुईं और अदालत के आदेशों का उल्लंघन करते हुए तृणमूल कांग्रेस के कई कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि बूथों पर प्रभावी रूप से केंद्रीय बलों ने "कब्जा" कर लिया था और सवाल उठाया कि क्या ऐसा करना उनकी ड्यूटी है.
डीप डाइव विद श्रवण गर्ग | ममता की हार का मतलब देश के लिए क्या होगा?
पश्चिम बंगाल का 2026 का विधानसभा चुनाव अब सिर्फ एक राज्य की सत्ता का संघर्ष नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरे देश की राजनीति और लोकतंत्र की दिशा तय करने वाला एक निर्णायक ‘कुरुक्षेत्र’ बन चुका है. ‘हरकारा डीप डाइव’ पर ऑडियो पॉडकास्ट में में, वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग ने इस चुनाव के उन अनछुए पहलुओं पर रोशनी डाली, जो इसे आज़ाद भारत के सबसे जटिल और अभूतपूर्व चुनावों में से एक बनाते हैं.
ममता का गढ़ बनाम भाजपा का बड़ा दांव: क्या ‘एसआईआर’ पलटेगा संतुलन?
‘पीपल्स पल्स रिसर्च ऑर्गनाइजेशन’ द्वारा जमीनी स्थिति के सूक्ष्म अध्ययन से पता चलता है कि राजनीतिक माहौल मौजूदा सत्ताधारी ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के पक्ष में है.“साउथ फर्स्ट” में जी मुरली कृष्णा के अनुसार, प्रतियोगिता की रूपरेखा ही एक ‘असंतुलन’ को प्रकट करती है. जहाँ टीएमसी सभी 294 निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव लड़ रही है, वहीं मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी केवल 200 के आसपास सीटों पर चुनाव लड़ रही है. प्रभावी रूप से, यदि टीएमसी पूरे 100 अंकों की परीक्षा दे रही है, तो भाजपा केवल लगभग 65 अंकों की परीक्षा दे रही है.
मोदी बनाम ममता: पूरा दिल्ली दरबार उतर आया है एक राज्य के चुनाव को जीतने?
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार और केंद्र के बीच लगभग बहुत सारे मुद्दों और मोर्चों पर टकराव चल रहा है. इनमें प्रमुख रूप से चुनावी रणनीतिकार संस्था I-PAC के दफ्तरों पर ईडी (ED) के छापे और उसके सह-संस्थापक विनेश चंदेल की गिरफ्तारी शामिल है. ममता बनर्जी का आरोप है कि केंद्रीय एजेंसियां उनके 800 से ज्यादा बूथ एजेंटों को गिरफ्तार करने की योजना बना रही हैं.

