आकर पटेल | धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा शिक्षा व्यवस्था का समाधान नहीं, लेकिन जवाबदेही का प्रतीक जरूर होगा.
‘हरकारा डीप डाइव’ की विशेष चर्चा. संपादक निधीश त्यागी और मानवाधिकार कार्यकर्ता आकार पटेल के बीच परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ी, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग और सोनम वांगचुक के आंदोलन पर गंभीर विश्लेषण.
आकार पटेल | सद्गुण के रूप में हिंसा
आकार पटेल का विशेष विश्लेषण. बहुसंख्यकवादी प्रोपेगेंडा फिल्मों की कतार में नई फिल्म 'चौहान' के टीज़र और कश्मीर में पैलेट गन (शॉटगन) के इस्तेमाल पर मानवाधिकारों, लोकतांत्रिक नीतियों व सरकारी जवाबदेही को लेकर तीखा वैचारिक प्रहार.
आकार पटेल | अधिकारों पर भारी नियम
वरिष्ठ पत्रकार और लेखक आकार पटेल का विशेष वैचारिक लेख. गैर-सरकारी संगठनों (NGO) और विदेशी फंडिंग (FCRA) पर संसदीय सहमति के बिना केवल नियमों में बदलाव कर मोदी सरकार द्वारा की जा रही सख्ती और उसके लोकतांत्रिक प्रभावों का गहरा विश्लेषण.
आकार पटेल | नये भारत का जायजा
वरिष्ठ पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता आकार पटेल के इस विशेष विश्लेषणात्मक लेख के अनुसार, असम और गुजरात जैसे राज्यों में अल्पसंख्यकों के खिलाफ संपत्ति खरीद-बिक्री के नियमों को कड़ा कर 'घेटोकरण' और 'अपार्थेड' (अलगाव) जैसी व्यवस्था को संस्थागत रूप दिया जा रहा है. असम में भाजपा द्वारा दो अलग-अलग धर्मों के बीच ज़मीन सौदों के लिए स्पेशल ब्रांच पुलिस जांच की अनिवार्यता और गुजरात में 'डिस्टर्ब्ड एरियाज़ एक्ट' (अशांत क्षेत्र अधिनियम) के तीन दशकों से जारी विस्तार पर लेखक ने गंभीर सवाल उठाए हैं. लेख में 2009 और 2019 के संशोधनों, कलेक्टर के विवेकाधीन अधिकारों, छह साल की जेल के प्रावधान और अमेरिका के 'फेयर हाउसिंग एक्ट' की तुलना के माध्यम से 'गुजरात मॉडल' की अंतर्निहित प्राथमिकताओं पर विस्तृत विश्लेषण पढ़ें.
आकार पटेल | सिर्फ लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहना महानता का प्रमाण नहीं
हरकारा डीप डाइव’ के इस लाइव एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार व मानवाधिकार कार्यकर्ता आकार पटेल और निधीश त्यागी ने राम माधव के लेख के आलोक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्षों के कार्यकाल और उनकी राजनीतिक विरासत की समीक्षा की है. चर्चा में जवाहरलाल नेहरू द्वारा निर्मित आधुनिक भारत की बुनियादी संस्थाओं (वैज्ञानिक अनुसंधान, उच्च शिक्षा) की तुलना वर्तमान दौर के ढांचागत व डिजिटल विकास से की गई है. सकल घरेलू उत्पाद (GDP), रोजगार के संकट, विदेश नीति और देश की सांस्कृतिक विविधता जैसे महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक व सामाजिक मुद्दों पर आधारित इस पूरी बातचीत का विश्लेषण यहाँ पढ़ें.
आकार पटेल | लंबाई बनाम विरासत
वरिष्ठ लेखक और विश्लेषक आकार पटेल के इस विशेष वैचारिक आलेख में भाजपा नेता राम माधव के उस लेख की तार्किक समीक्षा की गई है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लगातार 4,399 दिन पद पर रहने के रिकॉर्ड की सराहना की गई है. लेखक ने कार्यकाल की लंबाई की तुलना स्कोरबोर्ड (परिणामों) से करते हुए जवाहरलाल नेहरू और नरेंद्र मोदी की ऐतिहासिक विरासतों का विश्लेषण किया है. वर्ल्ड बैंक के आर्थिक आंकड़ों, ऐतिहासिक संस्थानों के निर्माण, 'भारत की मूल बहुलतावादी अवधारणा' और समकालीन राजनीतिक नीतियों के समाज पर पड़ रहे दीर्घकालिक प्रभावों के साथ पढ़ें यह पूरा विश्लेषण.
आकार पटेल : सियासी बिसात पर फंसी गाय का पेंच
इस विशेष राजनीतिक व ऐतिहासिक विश्लेषण के अनुसार, जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी और पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने गोवध पर देशव्यापी एकसमान कानून बनाने और गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने का समर्थन किया है ताकि 'बीफ़ लिंचिंग' की घटनाओं को रोका जा सके. लेख में भारतीय संविधान सभा की ऐतिहासिक बहसों, अनुच्छेद 48 के तहत गोवध प्रतिबंध के आर्थिक बनाम धार्मिक तर्कों, डॉ. राजेंद्र प्रसाद के पत्रों और देश में समान पशु वध कानून की आवश्यकता पर गहराई से प्रकाश डाला गया है. पढ़ें पूरी वैचारिक रिपोर्ट.
आकार पटेल | तथ्यों पर चिल्ला कर भारत सरकार अब दोहरी ज़बान से बोलती है.
प्रसिद्ध पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता आकार पटेल ने एक विदेशी पत्रकार के सवाल पर भारतीय विदेश मंत्रालय और घरेलू मीडिया की आक्रामक प्रतिक्रिया का मनोवैज्ञानिक व कूटनीतिक विश्लेषण किया है. उनके अनुसार, जब कोई वाक़ई ताक़तवर या अमीर होता है तो वह आलोचनाओं को नज़रअंदाज़ कर देता है, लेकिन सरकार की यह नाराज़गी और तीखे भाषण उसकी आंतरिक असुरक्षा को दर्शाते हैं. जानिए क्यों 'ईमानदारी' ही सबसे बेहतर कूटनीतिक नीति हो सकती है.
आकार पटेल | बहिष्करण अभियान: भारत अपनी चुनावी विरासत क्यों नष्ट कर रहा है?
वरिष्ठ पत्रकार आकार पटेल ने ओर्नित शानी की पुस्तक 'हाउ इंडिया बिकेम डेमोक्रेटिक' के हवाले से भारतीय लोकतंत्र के बदलते स्वरूप पर चिंता जताई है. विभाजन के समय शरणार्थियों और बेघरों को समेटने वाले देश में आज 'एसआईआर' (SIR) के तहत लाखों नाम हटाए जाने और इसके आर्थिक-राजनैतिक परिणामों पर एक तीखा विश्लेषण। पढ़ें पूरी रिपोर्ट.
आकार पटेल | मोदी पूरे भारत नहीं हैं, जैसे ट्रंप पूरा अमेरिका नहीं हैं
हरकारा डीप डाइव' के लाइव इंटरव्यू में वरिष्ठ पत्रकार निधीश त्यागी और मानवाधिकार कार्यकर्ता आकार पटेल के बीच भारत-इजराइल संबंधों, गाजा युद्ध और पीएम मोदी व बेंजामिन नेतन्याहू की नजदीकियों पर तीखी चर्चा हुई. आकार पटेल ने विदेश नीति में आए बदलावों और लोकतांत्रिक मूल्यों पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं. पढ़ें पूरा विश्लेषण.
आकार पटेल | ओडिशा में ईसाइयों के ख़िलाफ़ अत्याचार
मानवाधिकार कार्यकर्ता आकार पटेल ने ओडिशा में ईसाई आदिवासियों के खिलाफ हो रही संगठित हिंसा, सामाजिक बहिष्कार और संवैधानिक तंत्र की विफलता का खुलासा किया है. जन-न्यायाधिकरण की 300 गवाहियों पर आधारित एक विचलित करने वाली रिपोर्ट
आकार पटेल | ध्रुवीकरण की राजनीति
अगर आप एक सामान्य नागरिक हैं, तो आपके पास समर्थन करने और वोट देने के लिए अनेक पार्टियाँ हैं. डीएमके, एडीएमके, टीडीपी, एनसीपी, पीडीपी, टीएमसी, आईएनसी, जेडी(एस) और जेडी(यू) हैं, एनसीपी, टीआरएस, नई टीवीके, सीपीएम, सीपीआई और भी बहुत-सी पार्टियाँ हैं. अलग-अलग एजेंडे वाली पार्टियों की कोई कमी नहीं है.
आकार पटेल: भाजपा मुस्लिमों का पूर्ण बहिष्कार चाहती है
ख़ासकर प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाले अपने मौजूदा स्वरूप में, इस तथ्य के बारे में स्पष्ट है कि वह भारत के सबसे बड़े अल्पसंख्यक वर्ग का पूर्ण बहिष्कार चाहती है, जिसके ख़िलाफ़ वह ऐतिहासिक नाराज़गी रखती है. हमें इस भावना के गुण-दोषों में जाने की ज़रूरत नहीं है, सिवाय यह स्वीकार करने के कि पार्टी और उसके कई समर्थक ऐसा ही महसूस करते हैं. विचार करने वाला मुद्दा कुछ और है: जब भाजपा—और विशेष रूप से प्रधानमंत्री—इस बहिष्कार को बढ़ावा देने को लेकर इतने स्पष्ट हैं, तो फिर हम 'सबका साथ, सबका विश्वास' जैसे नारे और '140 करोड़ भारतीयों' के संदर्भ क्यों सुनते हैं?
आकार पटेल: ईरान को छोड़कर किसी भी अन्य देश की तुलना में भारतीयों ने सबसे अधिक कष्ट झेला है और झेल रहे हैं
हमारी अक्षमता को हम कैसे समझते हैं? या, यदि हम थोड़ी उदारी बरतें तो हमारी झिझक को, जो हमारे आस-पास की दुनिया को प्रभावित करने में आड़े आती है. दुनिया के बाक़ी हिस्सों की तरह, भारत भी ईरान पर अमेरिकी-इज़रायली युद्ध से नकारात्मक रूप से प्रभावित है. वास्तव में, ईरान को छोड़कर किसी भी अन्य देश की तुलना में भारतीयों ने सबसे अधिक कष्ट झेला है और झेल रहे हैं. इसका कारण, निश्चित रूप से, यह है कि खाड़ी में लगभग एक करोड़ भारतीय हैं, जो छह जीसीसी (GCC) देशों में से पाँच की संयुक्त नागरिक आबादी से भी बड़ी जनसंख्या है.

