श्रवण गर्ग | राहुल अब रुकने वाले नहीं हैं ! ‘इंडिया’ साथ चलेगा क्या ?
"वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग के इस विशेष राजनीतिक विश्लेषण के अनुसार, 'इंडिया' (INDIA) ब्लॉक की 8 जून की बैठक में राहुल गांधी द्वारा दिए गए लीक ऑडियो भाषण ने विपक्षी दलों से लेकर भाजपा और संघ के खेमे में सन्नाटा खींच दिया है. राहुल गांधी ने दो टूक शब्दों में सहयोगी दलों (सपा, राजद, माकपा) को चेताया है कि संस्थागत कब्जों के इस दौर में पुराने ढर्रे की राजनीति अब काम नहीं आएगी. लेख में पश्चिम बंगाल चुनाव परिणामों से ठीक पहले वीवीपैट पर्चियों के कचरे में मिलने, कोलकाता में 4,000 ईवीएम के जलने और उसके बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के दो-तिहाई सांसदों-विधायकों के भाजपा में शामिल होने की घटनाओं के जरिए विपक्ष के सामने खड़े अस्तित्व के संकट को रेखांकित किया गया है.
आकार पटेल | नये भारत का जायजा
वरिष्ठ पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता आकार पटेल के इस विशेष विश्लेषणात्मक लेख के अनुसार, असम और गुजरात जैसे राज्यों में अल्पसंख्यकों के खिलाफ संपत्ति खरीद-बिक्री के नियमों को कड़ा कर 'घेटोकरण' और 'अपार्थेड' (अलगाव) जैसी व्यवस्था को संस्थागत रूप दिया जा रहा है. असम में भाजपा द्वारा दो अलग-अलग धर्मों के बीच ज़मीन सौदों के लिए स्पेशल ब्रांच पुलिस जांच की अनिवार्यता और गुजरात में 'डिस्टर्ब्ड एरियाज़ एक्ट' (अशांत क्षेत्र अधिनियम) के तीन दशकों से जारी विस्तार पर लेखक ने गंभीर सवाल उठाए हैं. लेख में 2009 और 2019 के संशोधनों, कलेक्टर के विवेकाधीन अधिकारों, छह साल की जेल के प्रावधान और अमेरिका के 'फेयर हाउसिंग एक्ट' की तुलना के माध्यम से 'गुजरात मॉडल' की अंतर्निहित प्राथमिकताओं पर विस्तृत विश्लेषण पढ़ें.
सत्य सागर | भारत की ब्लिंकिट लोकतंत्र: धोखा एक बिज़नेस मॉडल के रूप में
वरिष्ठ पत्रकार सत्य सागर के इस विशेष विश्लेषणात्मक लेख के अनुसार, पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद हुए दलबदल ने साबित किया है कि भारतीय राजनीति अब विचारधारा या जनसेवा नहीं, बल्कि एक सफल व्यावसायिक उद्यम बन चुकी है. भाजपा ने समकालीन भारतीय पूंजीवाद और शहरी मध्यवर्ग की उपभोक्तावादी संस्कृति को मिलाकर एक ऐसा कॉर्पोरेट मॉडल तैयार किया है, जिसके सामने पारंपरिक विपक्ष एक छोटे पारिवारिक बिजनेस जैसा नजर आता है. लेखक ने चुनावी प्रणाली में आमूलचूल सुधार की वकालत करते हुए 'ब्लिंकिट लोकतंत्र' का विचार पेश किया है, जहां मतदाताओं को बंधुआ ग्राहक मानने के बजाय अमेज़न जैसी 'उत्पाद वापसी नीति' (राइट टू रीकॉल) और उपभोक्ता संरक्षण का अधिकार मिलना चाहिए. परीक्षा लीक और 'कॉकरोच जनता पार्टी' जैसे आंदोलनों के संदर्भ में पढ़ें राजनीति के इस नए बिज़नेस मॉडल की पूरी इनसाइड स्टोरी.
गिल्स वर्नियर्स | पार्टी का खेल बिगाड़ने वाले मतदाताओं की पसंद को खारिज कर रहे हैं
"राजनीतिक वैज्ञानिक गिल्स वर्नियर्स के इस विशेष वैचारिक लेख में अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसदों द्वारा पाला बदलकर एनडीए (NDA) को समर्थन देने की अटकलों के बीच भारतीय राजनीति में बढ़ते दलबदल संकट का गहरा विश्लेषण किया गया है. लेखक ने महाराष्ट्र (शिवसेना-एनसीपी), मध्य प्रदेश, कर्नाटक और गोवा के उदाहरणों के जरिए स्पष्ट किया है कि सामूहिक इस्तीफे और विभाजन कभी स्वतःस्फूर्त नहीं होते, बल्कि इनके पीछे सत्ताधारी दल (BJP) की सुनियोजित इंजीनियरिंग होती है. लेख में पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के क्रूर क्षेत्रीय कारक, कमजोर वैचारिक आधार, व्यावसायिक राजनीति, दलबदल विरोधी कानून (1985) की कानूनी खामियों और लोकसभा व राज्यसभा के संसदीय गणित पर इसके दूरगामी लोकतांत्रिक प्रभावों का विस्तृत ब्योरा दिया गया है.
श्रवण गर्ग | मोदी के डर से मुक्त होने का क्या यही सबसे अच्छा अवसर नहीं है ?
वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग के इस विस्तृत राजनीतिक विश्लेषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इर्द-गिर्द बने प्रभावशाली तंत्र, उनकी छवि के ‘कल्ट’ में बदलने और उसके सामाजिक-राजनीतिक असर की गहराई से पड़ताल की गई है. लेख में यह सवाल उठाया गया है कि क्या देश की राजनीति एक व्यक्ति केंद्रित विमर्श में सिमटती जा रही है और इसका लोकतंत्र पर क्या प्रभाव पड़ता है. साथ ही, विपक्ष की रणनीति, जनता के मनोविज्ञान, डर की राजनीति और सत्ता के केंद्रीकरण जैसे मुद्दों पर गंभीर चर्चा की गई है. लेख पाठकों को यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या यह समय डर से मुक्त होकर लोकतांत्रिक मूल्यों को पुनः स्थापित करने का सबसे उपयुक्त अवसर है.

