कैसे हिंदुत्व पश्चिम बंगाल में सत्ता-विरोधी लहर की भाषा बन गया
2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव ने राज्य के सियासी परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है, जहां भाजपा ने 207 सीटें जीतकर पहली बार सरकार बनाई है और सुवेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है. रिपोर्ट में विस्तार से विश्लेषण किया गया है कि कैसे ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) के खिलाफ उपजे जन-आक्रोश (जैसे स्कूल सर्विस कमीशन भर्ती घोटाला और आरजी कर मेडिकल कॉलेज की घटना) को भाजपा ने हिंदू पहचान और हिंदुत्व के वैचारिक ढांचे में समाहित किया. लेख में विजय रैलियों में बुलडोजर के इस्तेमाल, मायापुर में गौ-पूजा, तुष्टिकरण विरोधी संदेशों और बंगाल के दबे हुए सांप्रदायिक इतिहास पर शहरी मध्यवर्ग के बदलते रुख का पूरा राजनीतिक ब्योरा पढ़ें.
बंगाल की नई सरकार में दो चुनाव अधिकारियों को मिले ऊंचे पद; भाजपा पर ‘खुलेआम सांठगांठ’ का आरोप
बंगाल में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की नई भाजपा सरकार में उन दो नौकरशाहों की नियुक्ति को लेकर मंगलवार को राष्ट्रीय विपक्षी नेताओं ने तीखा हमला बोला, जिन्होंने राज्य के विधानसभा चुनावों की निगरानी की थी. विपक्ष ने इसे भाजपा और चुनाव आयोग के बीच “खुलेआम सांठगांठ” करार दिया है.
अरुण श्रीवास्तव | "बंगाल के पुनर्जागरण" की कहानी के ज़रिए चुनावी हेरफेर को सही ठहराने की भाजपा की कोशिश
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक राष्ट्रीय अंग्रेज़ी दैनिक में छपे एक लेख में, बंगाल की 'सभ्यतागत नींद' के रूप में बताई गई स्थिति पर चिंता ज़ाहिर की. उन्होंने कविगुरु रवींद्रनाथ ठाकुर का ज़िक्र किया. "हे नूतन, देखा दिक आरबार, जन्मेर प्रोथोमो शुभोक्खोन" . और सच्ची बंगाली विरासत की महानता को वापस लाने के भाजपा के मिशन को दोहराया. यह लेख उस दिन छपा था जब भाजपा ने भारत के राजनीतिक इतिहास में पहली बार बंगाल की सत्ता पर क़ब्ज़ा किया था.
जो ‘एसआईआर’ के लिए चुनाव आयोग के विशेष पर्यवेक्षक थे, अब पश्चिम बंगाल सीएम के सलाहकार नियुक्त
भाजपा सरकार ने आईएएस अधिकारी शांतनु बाला को मुख्यमंत्री का निजी सचिव नियुक्त किया है. 2017 बैच के अधिकारी बाला अपने पिछले असाइनमेंट में दक्षिण 24 परगना के अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (एडीएम) थे. अधिसूचनाओं के अनुसार, दोनों अधिकारियों को तत्काल अपने नए कार्यभार संभालने के लिए कहा गया है.
सुवेंदु अधिकारी: अवसरवाद, आरोप और सत्ता की भूख से बना 'नेता'
सुवेंदु अधिकारी की कहानी किसी आदर्शवादी नेता की नहीं, बल्कि एक ऐसे राजनीतिक खिलाड़ी की है जिसने हर पार्टी, हर विचारधारा और हर गठबंधन का इस्तेमाल केवल अपनी महत्वाकांक्षा की सीढ़ी के रूप में किया. कांग्रेस से तृणमूल, तृणमूल से भाजपा . यह महज़ एक राजनीतिक यात्रा नहीं है, यह अवसरवाद की पाठ्यपुस्तक है.

