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‘ जुर्म कहाँ है?’: 6 साल की कैद और अपने चर्चित भाषणों पर शरजील इमाम  

आईआईटी स्नातक और पीएचडी छात्र शरजील इमाम छह साल से अधिक समय से बिना मुकदमे के जेल में हैं. दिल्ली पुलिस ने उन्हें 2020 के दिल्ली दंगों की "बड़ी साजिश" का मुख्य चेहरा बताया है, जबकि उनकी गिरफ्तारी दंगों से पहले उनके द्वारा दिए गए भाषणों के आधार पर हुई थी.

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एससीएओआरए बनाम एसआईआर: कहानी एक ही, फैसले अलग-अलग;सुप्रीम कोर्ट से बंगाल को ऐसा विशेष उपचार नहीं मिला

सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन (एससीएओआरए) के वकीलों के चुनाव बनाम पश्चिम बंगाल मतदाता सूची (एसआईआर) अभ्यास के मामले पर विचार करें. दोनों मामलों में पीठ वही थी—मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉय माल्या बागची, लेकिन जो मानदंड अपनाए गए वे एक-दूसरे के बिल्कुल विपरीत थे.

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बंगाल: केंद्र के कर्मचारी ही कराएंगे वोटों की गिनती, सुप्रीम कोर्ट ने भी नहीं मानी टीएमसी की मांग

केंद्र सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों को मतगणना पर्यवेक्षकों और सहायकों के रूप में तैनात करने के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. शनिवार (2 मई 2026) को पार्टी की याचिका का निपटारा करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिका में अब किसी और आदेश की आवश्यकता नहीं है, सिवाय इसके कि 13 अप्रैल के चुनाव आयोग के सर्कुलर को पूरी तरह (अक्षरशः) लागू किया जाए.

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हेट स्पीच: अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा के खिलाफ कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनता, सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि 2020 में दिल्ली के शाहीन बाग में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) विरोधी प्रदर्शनों के दौरान कथित नफरत भरे भाषणों (हेट स्पीच) के लिए भाजपा नेताओं अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा के खिलाफ कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनता है. जहाँ भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर पूर्व केंद्रीय मंत्री हैं, वहीं वर्मा दिल्ली सरकार में मंत्री हैं.

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हरकारा रोज़ाना हरकारा रोज़ाना

‘हम बनाम वे’ की मानसिकता से पैदा होती है हेट स्पीच; कानूनों का खराब प्रवर्तन ‘हेट क्राइम्स’ की वजह: सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (29 अप्रैल, 2026) को कहा कि नफरत भरे भाषण (हेट स्पीच) और अफवाह फैलाना “हम बनाम वे” की मानसिकता से उपजा है और यह एक विविध समाज में भाईचारे की भावना को दूषित करने का काम करता है. हालांकि, अदालत ने नफरत भरे भाषणों और अपराधों के खिलाफ विशिष्ट कानून बनाने का निर्देश देने से इनकार कर दिया, इसके बजाय इस अपराध को कवर करने वाले मौजूदा कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करने का आव्हान किया.

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