सत्यनिकेतन हादसा: छात्रों की जान इतनी सस्ती क्यों? | प्रो. अपूर्वानंद #harkara

दिल्ली के दक्षिण परिसर के पास सत्यनिकेतन में इमारत गिरने से हुई छात्रों की मौत ने देश की शिक्षा व्यवस्था, भवन सुरक्षा और सरकारी जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य में देरी से लेकर छात्रों के लिए सुरक्षित और किफायती आवास की कमी तक, इस घटना ने कई व्यवस्थागत खामियों को उजागर किया है. हरकारा डीप डाइव में निधीश त्यागी ने प्रोफेसर अपूर्वानंद के साथ इसी मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की. बातचीत में यह सवाल उठाया गया कि दिल्ली विश्वविद्यालय और देश के अन्य विश्वविद्यालयों में लगातार छात्रों की संख्या और कोर्स बढ़ रहे हैं, लेकिन उनके रहने, पढ़ने और सुरक्षित वातावरण की व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही है. प्रोफेसर अपूर्वानंद ने सत्यनिकेतन हादसे को केवल एक इमारत गिरने की घटना नहीं, बल्कि छात्रों की लगातार उपेक्षा का प्रतीक बताया. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों के आसपास अनियोजित निर्माण, महंगे किराए, असुरक्षित कमरे और कमजोर निगरानी छात्रों को जोखिम में डाल रहे हैं. चर्चा में दिल्ली विश्वविद्यालय, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय और जामिया मिलिया इस्लामिया में हॉस्टल की कमी, छात्रों के लिए हाउसिंग पॉलिसी, निजी मकान मालिकों की मनमानी, फायर सेफ्टी मानकों और भवनों के नियमित निरीक्षण जैसे मुद्दे भी शामिल रहे. क्या विश्वविद्यालयों को सीटें और कोर्स बढ़ाने से पहले छात्रों के आवास और सुरक्षा की व्यवस्था नहीं करनी चाहिए? क्या हादसे के बाद अधिकारियों को केवल डांटना पर्याप्त है? और क्या सरकार, नगर निगम, विश्वविद्यालय प्रशासन तथा मकान मालिकों की जवाबदेही तय होगी? देखिए हरकारा डीप डाइव का यह महत्वपूर्ण एपिसोड. #Harkara #HarkaraDeepDive #निधीशत्यागी #अपूर्वानंद #SatyamNiketan #DelhiUniversity #StudentSafety #EducationSystem #HostelCrisis #StudentHousing #DelhiNews #PoliticalAnalysis

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