रिबॉर्न मनीष | आस्था के नाम पर खड़ी राजनीति को अब जवाबदेही की कसौटी पर खड़ा होना पड़ेगा
'हरकारा डीप डाइव' के लाइव एपिसोड में निधीश त्यागी और रीबोर्न मनीष (Reborn Manish) के बीच राम मंदिर चंदा चोरी विवाद पर विशेष चर्चा. जानिए तीन दशकों की आस्था, राजनीति और जवाबदेही के संकट का गहरा विश्लेषण.
श्रवण गर्ग | जब पासपोर्ट, आधार, वोटर आईडी और पैन भी नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं हैं, लोग अपनी नागरिकता कैसे साबित करेंगे?
'हरकारा डीप डाइव' में निधीश त्यागी और वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग की विशेष चर्चा. विदेश मंत्रालय के 'पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं' वाले बयान के बाद देश में बढ़े असमंजस, बिहार के 'SIR' अभियान और नागरिकता साबित करने के दस्तावेजी संकट पर गंभीर विश्लेषण.
राहुल देव | इतने कई दशकों में हिंदुत्व ढांचे को इससे बड़ी चुनौती नहीं मिली है, जितनी मंदिर से जुड़े इन खुलासों से मिली है.
'हरकारा डीप डाइव' में वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव और निधीश त्यागी की विशेष चर्चा: राम मंदिर ट्रस्ट विवाद, चंदे और प्रबंधन में अनियमितता के आरोपों, संघ-भाजपा की जवाबदेही और मीडिया की भूमिका पर तीखा विश्लेषण।
इंदु भूषण पांडे | यही रामलला इन्हें शीर्ष पर ले गए हैं और लोग अब चर्चा कर रहे हैं कि यही रामलला इन्हें मिट्टी में भी मिला सकते हैं.
'हरकारा डीप डाइव' में वरिष्ठ पत्रकार निधीश त्यागी और अयोध्या के पत्रकार इंदु भूषण पांडे का बड़ा खुलासा: राम मंदिर चढ़ावा और दान विवाद में नृपेंद्र मिश्रा के बयान, एसआईटी (SIT) जांच की पारदर्शिता और शीर्ष नेतृत्व की चुप्पी पर तीखी चर्चा.
श्रवण गर्ग | विपक्ष का पोस्टमार्टम करने वालों को यह भी देखना चाहिए कि उनकी अपनी सेहत कैसी है.
'हरकारा डीप डाइव' के लाइव एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग और निधीश त्यागी का विशेष राजनीतिक विश्लेषण. जानिए कर्नाटक में संघ पर उठे सवालों, उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की भूमिका, मध्य प्रदेश के जमीन विवाद और भाजपा-आरएसएस के आंतरिक अंतर्विरोधों पर पूरी पड़ताल.
शोभन सक्सेना | इजराइल की सबसे बड़ी चिंता यह है कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता हो जाए
'हरकारा डीप डाइव' (Harkara Deep Dive) के लाइव एपिसोड में निधीश त्यागी ने वरिष्ठ पत्रकार शोभन सक्सेना के साथ अमेरिका-ईरान समझौते, पश्चिम एशिया की बदलती राजनीति और इजराइल की रणनीतिक चिंताओं पर विस्तार से चर्चा की. जानिए वैश्विक शक्ति संतुलन और भारत पर इसके प्रभाव की पूरी पड़ताल.
श्रवण गर्ग | सरकार ने अपनी जनता, अपने वोटर्स, अपना मीडिया, अपना चुनाव आयोग, अपने पाठ्यक्रम चुन लिए हैं.
'हरकारा डीप डाइव' (Harkara Deep Dive) के लाइव एपिसोड में निधीश त्यागी और वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग ने आगामी मानसून सत्र, विपक्षी दलों में टूट और भारतीय लोकतंत्र के भविष्य पर गंभीर चर्चा की. जानिए क्या संसद का यह सत्र देश की राजनीति के लिए निर्णायक मोड़ साबित होगा.
श्रवण गर्ग | राहुल गांधी का जन्मदिन नहीं, जनता की बेचैनी और उम्मीदों का प्रदर्शन
'हरकारा डीप डाइव' (Harkara Deep Dive) के लाइव एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग और निधिश त्यागी ने राहुल गांधी के 56वें जन्मदिन के मौके पर भारतीय राजनीति, विपक्ष की चुनौतियों, पीएम मोदी की अंतरराष्ट्रीय स्थिति और भारतीय लोकतंत्र के भविष्य पर एक विस्तृत व गंभीर चर्चा की है.
कुणाल पुरोहित | मुझे नहीं लगता प्लेटफॉर्म्स की कोई आइडियोलॉजी है, वे सत्ता और धंधे के साथ हैं
'हरकारा डीप डाइव' के इस एपिसोड में निधीश त्यागी और लेखक कुणाल पुरोहित के बीच 'H-Pop' (हिंदुत्व पॉप) संगीत और नफरत के डिजिटल कारोबार पर विशेष चर्चा. जानिए कैसे सोशल मीडिया एल्गोरिदम, विज्ञापन और भड़काऊ गीत मिलकर समाज और युवा पीढ़ी को प्रभावित कर रहे हैं.
प्रो. संतोष मेहरोत्रा | रोजगार कहीं अधिक पैदा हो सकता था, अगर सरकार ने समग्र औद्योगिक नीति अपनाई होती
'हरकारा डीप डाइव' के इस एपिसोड में निधीश त्यागी और अर्थशास्त्री प्रो. संतोष मेहरोत्रा के बीच भारत में बढ़ती बेरोजगारी और रोजगार संकट पर विशेष चर्चा. जानिए उनकी पुस्तक 'इंडिया आउट ऑफ वर्क' के हवाले से क्यों देश का एमएसएमई (MSME) सेक्टर संकट में है और युवाओं के लिए क्या हैं विकल्प.
श्रवण गर्ग | मोदी जी अगर सिस्टम में आए और बने हुए हैं तो उसका एक बड़ा कारण कांग्रेस में उनके स्लीपर सेल्स हैं.
'हरकारा डीप डाइव' के लाइव एपिसोड में निधीश त्यागी और वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग के बीच विपक्षी राजनीति और इंडिया (INDIA) गठबंधन के भविष्य पर हुई तीखी चर्चा. जानिए क्यों अब राहुल गांधी सहयोगी दलों के बजाय कांग्रेस, लोकतंत्र और संविधान को बचाने की रणनीति पर अकेले आगे बढ़ने का मन बना चुके हैं.
कार्टूनिस्ट मंजुल | 2016 के आसपास से यह निर्देश आने शुरू हो गए थे कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह का चेहरा कार्टून में नहीं दिखाना है.
‘हरकारा डीप डाइव’ के इस विशेष लाइव एपिसोड में निधीश त्यागी ने देश के वरिष्ठ कार्टूनिस्ट मंजुल के साथ जो सैको की मुजफ्फरनगर दंगों पर केंद्रित आगामी ग्राफिक नॉवेल को लेकर उपजे विवाद पर एक विस्तृत और गंभीर चर्चा की है. बातचीत के दौरान मंजुल ने खुलासा किया कि कैसे प्रकाशक पेंग्विन रैंडम हाउस कथित तौर पर किताब की मूल सामग्री में बदलाव चाहता है, जिसे ग्राफिक पत्रकार जो सैको सेंसरशिप मानते हुए खारिज कर रहे हैं. मंजुल ने इसे केवल एक किताब का विवाद न मानकर भारत में मुख्यधारा के मीडिया से गायब होते राजनीतिक कार्टूनों, संभावित सरकारी व सामाजिक दबावों के डर से पैदा हुई 'सेल्फ-सेंसरशिप' और लोकतांत्रिक समाज में असहमति व वैकल्पिक विचारों के सिकुड़ते दायरे का एक बड़ा प्रतीक बताया है.
श्रवण गर्ग | मोदी जी जब रिकॉर्ड कायम करते जाएंगे, तब जनता अपने अधिकार खोने के भी रिकॉर्ड कायम करती जाएगी.
‘हरकारा डीप डाइव’ के इस विशेष लाइव एपिसोड में निधीश त्यागी ने वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के 12 वर्ष पूरे होने के वास्तविक राजनीतिक व लोकतांत्रिक अर्थों पर विस्तृत चर्चा की. भाजपा जहां इसे जवाहरलाल नेहरू के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ने वाली ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में मना रही है, वहीं श्रवण गर्ग ने देश में बढ़ते सामाजिक ध्रुवीकरण, नागरिक अधिकारों की स्थिति, संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता और रुपये की गिरती स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है. इसके साथ ही, अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में भारतीय नाविकों की मौत के संदर्भ में भारत की विदेश नीति, संप्रभुता और वैश्विक प्रतिष्ठा का एक तीखा व निष्पक्ष विश्लेषण पढ़ें.
श्रवण गर्ग | आज अगर विपक्ष कमजोर है और मीडिया अपनी भूमिका में नहीं है, तो जुडिशरी की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है
हरकारा डीप डाइव’ के इस विशेष लाइव एपिसोड में निधीश त्यागी ने वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग से भारतीय न्यायपालिका की मौजूदा स्थिति, उसकी विश्वसनीयता और पिछले 12 वर्षों में लोकतांत्रिक संस्थाओं के बदलते स्वरूप पर विस्तृत बातचीत की. श्रवण गर्ग ने लंदन में भारत के जजों, वकीलों और केंद्रीय मंत्रियों के बीच दिखी नजदीकियों, जजों के लिए तय आचार संहिता, सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने वाले हालिया अध्यादेश और अदालतों में लंबित नियुक्तियों पर बेबाक राय रखी है. इसके अलावा, इंडियन एक्सप्रेस में आपातकाल के अपने अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने न्यायपालिका, कार्यपालिका, विधायिका और मीडिया के मौजूदा संकट का एक तुलनात्मक व ऐतिहासिक विश्लेषण प्रस्तुत किया है.
राजेश चतुर्वेदी | जो जिस चुनाव चिन्ह पर जीतकर आया है, उसे दल बदलने से पहले इस्तीफा देकर जनता से नया जनादेश लेना चाहिए
‘हरकारा डीप डाइव’ के इस राजनीतिक एपिसोड में निधिश त्यागी और वरिष्ठ पत्रकार राजेश चतुर्वेदी ने मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र रद्द होने के बाद उपजे संवैधानिक और राजनीतिक संकट पर गहराई से चर्चा की है. विश्लेषण में बताया गया है कि कैसे एक अदालती समन को आधार बनाकर भाजपा ने आपत्ति दर्ज कराई और कांग्रेस की निश्चित मानी जा रही सीट को संकट में डाल दिया. झारखंड और मध्य प्रदेश में चुनाव आयोग के दोहरे रवैये के आरोपों, कांग्रेस द्वारा अपने विधायकों को चार्टर्ड प्लेन से भेजने की मजबूरी, तेलंगाना प्रभारी के रूप में नटराजन की अंदरूनी राजनीतिक घेराबंदी और 2014 के बाद देश में मजबूत हुई 'सैम-दाम-दंड-भेद' की राजनीति पर पढ़ें यह विस्तृत आलेख.
आकार पटेल | सिर्फ लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहना महानता का प्रमाण नहीं
हरकारा डीप डाइव’ के इस लाइव एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार व मानवाधिकार कार्यकर्ता आकार पटेल और निधीश त्यागी ने राम माधव के लेख के आलोक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्षों के कार्यकाल और उनकी राजनीतिक विरासत की समीक्षा की है. चर्चा में जवाहरलाल नेहरू द्वारा निर्मित आधुनिक भारत की बुनियादी संस्थाओं (वैज्ञानिक अनुसंधान, उच्च शिक्षा) की तुलना वर्तमान दौर के ढांचागत व डिजिटल विकास से की गई है. सकल घरेलू उत्पाद (GDP), रोजगार के संकट, विदेश नीति और देश की सांस्कृतिक विविधता जैसे महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक व सामाजिक मुद्दों पर आधारित इस पूरी बातचीत का विश्लेषण यहाँ पढ़ें.
श्रवण गर्ग | देश की जनता आश्वासन चाहती है कि आपातकाल नहीं लगेगा
‘हरकारा डीप डाइव’ के इस लाइव एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग और निधीश त्यागी ने 6 जून को दिल्ली में प्रस्तावित 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के आंदोलन, अभिजीत दीपके की भारत वापसी और राहुल गांधी के हालिया बयानों के राजनीतिक निहितार्थों का विश्लेषण किया है. श्रवण गर्ग ने CJP की अचानक बढ़ती लोकप्रियता, उसकी फंडिंग और वास्तविक उद्देश्यों पर सवाल उठाते हुए इसकी तुलना 2011 के 'इंडिया अगेंस्ट करप्शन' आंदोलन से की है. नीट परीक्षा घोटाले से उपजे छात्र असंतोष और जून के महीने में आपातकाल (1975) की चर्चाओं के दोबारा उभरने पर पढ़ें यह पूरा राजनीतिक विमर्श.
श्रवण गर्ग | ये गजब का त्रिकोण जैसा बना है. सरकार, हिंदू और मुसलमान और बीच में गाय खड़ी हुई है.
‘हरकारा डीप डाइव’ के इस विशेष संवाद में वरिष्ठ पत्रकार निधीश त्यागी और श्रवण गर्ग ने पश्चिम बंगाल में बकरीद के दौरान गायों की कुर्बानी को लेकर उपजे राजनीतिक व आर्थिक विवाद का गहरा विश्लेषण किया है. चर्चा में बताया गया है कि कैसे मुस्लिम समुदाय द्वारा गाय न काटने के फैसले ने शुभेंदु अधिकारी की हिंदुत्व राजनीति के समीकरण को बदल दिया और इसका सीधा आर्थिक नुकसान ग्रामीण हिंदू पशुपालकों को उठाना पड़ा. मध्यप्रदेश, राजस्थान और बंगाल के घटनाक्रमों को जोड़ते हुए पढ़ें पूरी रिपोर्ट."
श्रवण गर्ग | क्या सीजेआई द्वारा की गई एक टिप्पणी, 140 करोड़ के देश में किसी बड़े आंदोलन का ट्रिगर बन सकती है?
वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग और निधीश त्यागी के डिजिटल शो 'हरकारा डीप डाइव' का विस्तृत विश्लेषण. इस इंटरव्यू में अचानक उभरी 'कॉकरोच जनता पार्टी' के पीछे छिपे भू-राजनीतिक और वैचारिक खेल पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं. जानिए कैसे 1974 के जेपी आंदोलन और 2011 के अन्ना आंदोलन की तर्ज पर इस नए डिजिटल प्रयोग को स्थापित राजनीतिक व्यवस्था और विपक्ष दोनों को कमजोर करने वाली एक 'साजिश' के रूप में देखा जा रहा है. पढ़ें पूरी रिपोर्ट.
अपूर्वानंद | जो आरएसएस कहता है, उस पर नहीं, जो करता है उस पर ध्यान देना चाहिए
हरकारा डीप डाइव’ के लाइव इंटरव्यू में वरिष्ठ पत्रकार निधीश त्यागी और प्रोफेसर अपूर्वानंद ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष अभियान, इसकी वित्तीय पारदर्शिता, वैचारिक दोहरेपन और इजराइल-भारत के बदलते संबंधों पर एक तीखा और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण साझा किया है. पढ़ें पूरी रिपोर्ट.

