यह प्रधान के इस्तीफे से शुरू हुआ है और प्रधानमंत्री के इस्तीफे पर ही खत्म होगा
‘हरकारा डीप डाइव’ में निधीश त्यागी के साथ वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग ने धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफे के बाद छात्र आंदोलन, संसद में जारी गतिरोध और सरकार के सामने खड़े सवालों पर चर्चा की. बातचीत का केंद्रीय सवाल था कि क्या एक मंत्री के इस्तीफे के साथ आंदोलन खत्म हो गया है, या जंतर-मंतर से निकला असंतोष अब देश के अलग-अलग हिस्सों में नए रूप में दिखाई देगा.
श्रवण गर्ग का कहना था, "जो आंदोलन खत्म हुआ है, वो जंतर-मंतर पर हुआ है, देश में नहीं हुआ है." उनके मुताबिक धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा आंदोलन की एक उपलब्धि जरूर है, लेकिन छात्रों की नाराजगी केवल उनके पद छोड़ने तक सीमित नहीं थी. परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता, प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई और जवाबदेही जैसे सवाल अब भी बने हुए हैं. उन्होंने कहा, "जब मुल्क सड़कों पर होता है, तब घर वापस नहीं लौटता."
इसका एक संकेत संसद में भी दिखाई दे रहा है. प्रधान के इस्तीफे के बाद विपक्ष सरकार से प्रधानमंत्री की माफी और छात्र प्रदर्शनों के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर जवाब मांग रहा है. इसी गतिरोध के बीच लोकसभा की कार्यवाही बार-बार स्थगित हुई. श्रवण गर्ग के मुताबिक परीक्षा व्यवस्था से जुड़े विधेयक और परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों के बीच यह टकराव आने वाले दिनों में सरकार की मुश्किलें बढ़ा सकता है.
सरकार ने परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने और पेपर लीक रोकने के लिए विधेयक पेश किया है. साथ ही नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक टास्क फोर्स का गठन किया गया है. हालांकि, चर्चा में टास्क फोर्स के कुछ सदस्यों की पृष्ठभूमि को लेकर सवाल उठाए गए. श्रवण गर्ग ने कहा कि नंदन नीलेकणि की ईमानदारी पर सवाल नहीं है, लेकिन सरकार की नीयत और टास्क फोर्स की सिफारिशों के क्रियान्वयन को लेकर संदेह बना रहेगा. छात्रों के लिए असली परीक्षा यह होगी कि ये सुधार जमीन पर कब और कैसे दिखाई देते हैं.
बातचीत में बिहार में छात्र प्रदर्शनों के दौरान हिंसा, दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग और जुनैद के परिवार के कथित उत्पीड़न का भी जिक्र हुआ. श्रवण गर्ग ने आशंका जताई कि आंदोलन खत्म होने की घोषणा के बावजूद अलग-अलग राज्यों में छात्रों और युवाओं का असंतोष अलग-अलग आंदोलनों के रूप में आगे बढ़ सकता है.
धर्मेंद्र प्रधान के बाद नए शिक्षा मंत्री और शिक्षा व्यवस्था में आरएसएस के कथित प्रभाव को लेकर भी चर्चा हुई. गर्ग ने आरोप लगाया कि पिछले वर्षों में विश्वविद्यालयों, परीक्षा संस्थाओं और शैक्षणिक ढांचे में वैचारिक हस्तक्षेप बढ़ा है. ऐसे में उनके मुताबिक सवाल केवल यह नहीं है कि शिक्षा मंत्री कौन है, बल्कि यह भी है कि शिक्षा नीति और संस्थाओं की दिशा क्या रहने वाली है.
डीप डाइव का निष्कर्ष इसी सवाल पर ठहरता है कि जंतर-मंतर से छात्रों की भीड़ लौट सकती है, लेकिन उनके सवाल नहीं. श्रवण गर्ग के शब्दों में, "जंतर-मंतर खाली हुआ है. देश अभी खाली नहीं हुआ है. सड़कें अभी खाली नहीं हुई हैं. लोगों के दिल से गुस्सा अभी खाली नहीं हुआ है." अब अगला लिटमस टेस्ट यह होगा कि सरकार जवाबदेही तय करती है या आंदोलन का यह अध्याय किसी नए मोर्चे पर फिर खुलता है.
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