राकेश कायस्थ | संघ और भाजपा के भीतर मौजूद अंतर्विरोध अब पहले की तुलना में अधिक स्पष्ट होकर सामने आ रहे हैं 

‘हरकारा डीप डाइव’ के इस विशेष एपिसोड में निधीश त्यागी ने लेखक और पत्रकार राकेश कायस्थ से राम मंदिर से जुड़े हालिया विवाद, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी के रिश्तों, हिंदुत्व की राजनीति तथा देश के मौजूदा राजनीतिक माहौल पर विस्तार से बातचीत की. चर्चा में यह समझने की कोशिश की गई कि अयोध्या से सामने आए घटनाक्रम का असर केवल एक मंदिर तक सीमित है या यह व्यापक राजनीतिक और सामाजिक बदलाव का संकेत है.

राकेश कायस्थ का कहना है कि हालिया घटनाओं ने पहली बार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को सार्वजनिक जवाबदेही के दायरे में ला खड़ा किया है. उनके अनुसार, लंबे समय तक संघ स्वयं को राजनीतिक सत्ता से ऊपर नैतिक मार्गदर्शक के रूप में प्रस्तुत करता रहा, लेकिन राम मंदिर से जुड़े विवाद ने उसकी भूमिका और जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. उनका मानना है कि यही वजह है कि यह मामला केवल आर्थिक अनियमितताओं का नहीं, बल्कि नैतिक विश्वसनीयता का भी बन गया है.

चर्चा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संघ प्रमुख मोहन भागवत के संबंधों पर भी विस्तार से बात हुई. राकेश कायस्थ के अनुसार, दोनों एक ही वैचारिक धारा से आते हैं, लेकिन आज भारतीय राजनीति में सत्ता के दो प्रमुख केंद्र दिखाई देते हैं. उनका तर्क है कि बीते वर्षों में राजनीतिक शक्ति का केंद्रीकरण बढ़ा है, जबकि जवाबदेही का दायरा अपेक्षाकृत कमजोर हुआ है. इसी कारण संघ और भाजपा के भीतर चल रहे अंतर्विरोध अब पहले की तुलना में अधिक स्पष्ट दिखाई देने लगे हैं.

राम मंदिर आंदोलन की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल धार्मिक नहीं, बल्कि राजनीतिक परियोजना भी रहा है. उनके अनुसार, मंदिर निर्माण के बाद उससे जुड़ी व्यवस्थाओं और आर्थिक मामलों पर उठे सवालों ने उन लोगों को भी असहज किया है, जिन्होंने इसे आस्था का विषय मानकर समर्थन दिया था. उनका मानना है कि यदि आस्था से जुड़े संस्थानों पर सवाल उठते हैं, तो उनका पारदर्शी जवाब देना भी उतना ही आवश्यक है.

बातचीत में देश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक माहौल का भी उल्लेख हुआ. राकेश कायस्थ ने दावा किया कि आर्थिक चुनौतियों, रोजगार और विकास जैसे मुद्दों की तुलना में पहचान आधारित राजनीति अधिक प्रमुख हो गई है. उन्होंने कहा कि समाज में धार्मिक और सामाजिक ध्रुवीकरण को लगातार राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनाया गया, जबकि आम नागरिक महंगाई, रोजगार और आय से जुड़े सवालों का समाधान चाहता है.

राकेश कायस्थ का मानना है कि यह केवल एक विवाद नहीं, बल्कि हिंदुत्व की राजनीति, संघ-भाजपा संबंधों और भारतीय राजनीति की दिशा को समझने का महत्वपूर्ण अवसर है. पूरी बातचीत यहां सुन सकते हैं. 

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