श्रवण गर्ग | देश की जनता आश्वासन चाहती है कि आपातकाल नहीं लगेगा

हरकारा डीप डाइव के इस लाइव एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग और नितीश त्यागी ने 6 जून को प्रस्तावित "कॉकरोच जनता पार्टी" के प्रदर्शन, अभिजीत दीपके के भारत आगमन, राहुल गांधी के हालिया बयानों और देश के राजनीतिक माहौल पर विस्तार से चर्चा की. बातचीत का केंद्र यह सवाल रहा कि क्या देश किसी बड़े राजनीतिक घटनाक्रम की ओर बढ़ रहा है या फिर आशंकाओं, अफवाहों और राजनीतिक अटकलों का ऐसा दौर चल रहा है जिसमें जनता को स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहे हैं.

चर्चा की शुरुआत 6 जून को दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन से हुई. पिछले कुछ सप्ताहों में अचानक चर्चा में आई "कॉकरोच जनता पार्टी" और उसके संस्थापक अभिजीत दीपके को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं. श्रवण गर्ग ने कहा कि किसी भी नए राजनीतिक अभियान के पीछे कौन लोग हैं, उसकी फंडिंग कहां से आ रही है और उसका अंतिम उद्देश्य क्या है, यह ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब लोकतांत्रिक व्यवस्था में मिलना चाहिए. उनके अनुसार इतनी तेजी से किसी संगठन का राष्ट्रीय राजनीतिक बहस के केंद्र में पहुंच जाना स्वाभाविक रूप से जिज्ञासा और संदेह दोनों पैदा करता है.

बातचीत में राहुल गांधी के हालिया बयान का भी उल्लेख हुआ. राहुल गांधी ने दावा किया था कि देश गंभीर संकट की स्थिति में पहुंच सकता है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने इस्तीफे या किसी असाधारण कदम का विकल्प खड़ा हो सकता है. श्रवण गर्ग ने कहा कि भले ही इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि न हो, लेकिन ऐसे बयान राजनीतिक माहौल में नई चर्चाओं को जन्म देते हैं. उनका तर्क था कि जब विपक्ष का प्रमुख नेता इस तरह की चेतावनी देता है तो नागरिकों के मन में सवाल पैदा होना स्वाभाविक है.

इसी संदर्भ में चर्चा 1975 के आपातकाल तक पहुंची. श्रवण गर्ग ने कहा कि जून का महीना भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में विशेष महत्व रखता है क्योंकि इसी महीने आपातकाल लागू हुआ था. उन्होंने याद दिलाया कि आज भी भारतीय राजनीति में आपातकाल का उल्लेख लोकतांत्रिक अधिकारों और सत्ता के केंद्रीकरण पर बहस के संदर्भ में किया जाता है. उनके अनुसार यदि राजनीतिक हलकों में आपातकाल जैसी चर्चाएं दोबारा उभर रही हैं तो सरकार को स्पष्ट रूप से यह भरोसा देना चाहिए कि लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक प्रक्रियाओं पर कोई खतरा नहीं है.

चर्चा का एक बड़ा हिस्सा "कॉकरोच जनता पार्टी" की मांगों पर केंद्रित रहा. बातचीत में कहा गया कि आंदोलन का घोषित उद्देश्य केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग है. श्रवण गर्ग ने सवाल उठाया कि यदि आंदोलन की प्रमुख मांग यही है तो सरकार बातचीत का रास्ता क्यों नहीं अपना रही. उन्होंने 2011 के इंडिया अगेंस्ट करप्शन आंदोलन का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय सरकार और आंदोलनकारियों के बीच संवाद स्थापित करने की कोशिश की गई थी, जिससे राजनीतिक तनाव को कम करने का प्रयास हुआ था.

नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े विवाद भी चर्चा का हिस्सा बने. दोनों वक्ताओं ने कहा कि देशभर में छात्रों के बीच असंतोष बढ़ रहा है और लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों ने युवाओं के भविष्य को लेकर चिंता पैदा की है. उनके अनुसार असली मुद्दा शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता और युवाओं का भविष्य है, लेकिन राजनीतिक संघर्ष के बीच यह मूल प्रश्न कहीं पीछे छूटता दिखाई देता है.

6 जून के कार्यक्रम और 8 जून को प्रस्तावित विपक्षी बैठक को लेकर भी चर्चा हुई. वक्ताओं ने कहा कि इन दोनों घटनाओं के बीच का समय राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हो सकता है. हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके पास किसी बड़े घटनाक्रम की पुष्टि करने वाला कोई तथ्य नहीं है, बल्कि वे केवल उन सवालों की ओर ध्यान दिला रहे हैं जो सार्वजनिक जीवन में लगातार उठ रहे हैं. पूरी बातचीत यहाँ सुनें.

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