दया, दान और दोस्ती: मोदी–ट्रंप रिश्ते ने भारत को कहाँ पहुँचाया? | विशाल शिवहरे #harkara
भारत और अमेरिका के रिश्ते कभी तीन बुनियादों पर टिके थे — सच, सम्मान और सामरिक विषय. ग्लोबल गांधी के कोऑर्डिनेटर विशाल शिवहरे का कहना है कि आज वे तीन बुनियादें हटकर तीन दूसरी चीज़ों पर आ गई हैं — दया, दान और दोस्ती. और इसका नतीजा भारत भुगत रहा है. हरकारा डीपडाइव की इस बातचीत में निधीश त्यागी और विशाल शिवहरे नेहरू के दौर से लेकर पोखरन-2, करगिल, मनमोहन सिंह के परमाणु क़रार और फिर मोदी–ट्रंप युग तक की पूरी यात्रा खोलते हैं. ऑपरेशन सिंदूर के बाद ट्रंप का सीज़फ़ायर का बार-बार दावा, टैरिफ़, एच-1बी वीज़ा पर एक लाख डॉलर की फ़ीस, हथकड़ियों में लौटाए गए भारतीय, अमेरिका में बढ़ते हेट क्राइम — और इन सब पर भारत सरकार की चुप्पी. शिवहरे का तर्क है कि जब विदेश नीति दो व्यक्तियों के रिश्ते में सिमट जाती है, तो उसका सीधा फ़ायदा आपके प्रतिद्वंद्वी को मिलता है. वे बताते हैं कि कैसे कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने उसी ट्रंप के सामने विपक्ष, प्रांतों और जनता को साथ लेकर एक दूसरा रास्ता निकाला — और भारत वह क्यों नहीं कर पाया. आख़िर में एक ठोस सुझाव: प्रधानमंत्री के सीधे मातहत एक विशेष दूत, जो उद्योग और निर्यातकों की सलाह लेकर वॉशिंगटन से सीधे बात करे.

