कुमार राणा | मतदान के अधिकार से वंचित करना लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है
‘कड़वी कॉफी’ के इस एपिसोड में प्रोफेसर अपूर्वानंद ने शोधकर्ता, लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता कुमार राणा के साथ पश्चिम बंगाल की राजनीति में आए बड़े बदलाव पर विस्तार से चर्चा की. बातचीत का केंद्र केवल चुनावी नतीजे नहीं थे, बल्कि वह पूरी प्रक्रिया थी जिसके जरिए बंगाल की सत्ता तृणमूल कांग्रेस से बीजेपी के हाथों में पहुंची.
अपूर्वानंद | 12वीं कक्षा के बच्चों ने हमें आंख में उंगली डालकर दिखलाया कि यह व्यवस्था कितनी त्रुटिपूर्ण है
हरकारा डीप डाइव’ के इस लाइव इंटरव्यू में वरिष्ठ पत्रकार निधीश त्यागी और दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अपूर्वानंद ने सीबीएसई 12वीं बोर्ड परीक्षा के मूल्यांकन विवाद और ऑनलाइन मार्किंग सिस्टम (OSM) की तकनीकी व संस्थागत खामियों पर विस्तार से चर्चा की है. संवाद में उठाया गया है कि कैसे एक विवादित निजी कंपनी को डिजिटल मूल्यांकन का जिम्मा सौंपकर लाखों छात्रों के भविष्य को दांव पर लगाया गया. भारत की परीक्षा-केंद्रित कोचिंग संस्कृति, युवाओं पर मानसिक दबाव और लोकतांत्रिक संस्थाओं के संकट पर पढ़ें यह पूरी रिपोर्ट.
अपूर्वानंद | जो आरएसएस कहता है, उस पर नहीं, जो करता है उस पर ध्यान देना चाहिए
हरकारा डीप डाइव’ के लाइव इंटरव्यू में वरिष्ठ पत्रकार निधीश त्यागी और प्रोफेसर अपूर्वानंद ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष अभियान, इसकी वित्तीय पारदर्शिता, वैचारिक दोहरेपन और इजराइल-भारत के बदलते संबंधों पर एक तीखा और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण साझा किया है. पढ़ें पूरी रिपोर्ट.
भारत में अल्पसंख्यकों पर हमलों के बीच आरएसएस क्यों कर रहा है पश्चिम में लॉबिंग
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अपनी वैश्विक छवि को मजबूत करने और अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा के आरोपों को खारिज करने के लिए अमेरिका, यूके और जर्मनी के दौरों का आयोजन कर रहा है. 'अल जजीरा' की इस विस्तृत रिपोर्ट में आरएसएस की वैचारिक पृष्ठभूमि, हेट स्पीच के आंकड़े और 'एसआईआर' विवाद का विश्लेषण किया गया है. पढ़ें पूरी रिपोर्ट
अपूर्वानंद | एसआईआर के विरोधी दलों को बंगाल चुनाव से दूर रहना चाहिए था. अब उन्होंने मतदाताओं के नाम काटे जाने को सामान्य बना दिया है
चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के 2026 विधानसभा चुनाव परिणामों से उभरने वाला सबसे महत्वपूर्ण संदेश यह है: सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार का विचार अब पूरी तरह दफ़न हो चुका है. पराकाल प्रभाकर स्पष्ट पीड़ा के साथ लिखते हैं कि यदि पश्चिम बंगाल में 27 लाख वैध मतदाताओं का मताधिकार छीन लिया जाना हमारी सबसे गहरी चिंता नहीं बनती, तो हमें स्वयं को लोकतंत्र कहना बंद कर देना चाहिए.
बंगाल चुनाव में वोटर लिस्ट विवाद और मुसलमानों की भागीदारी पर उठते सवाल
पश्चिम बंगाल चुनाव के माहौल और एग्जिट पोल बताते हैं कि ममता बनर्जी और टीएमसी के सामने इस बार कड़ी चुनौती है, जबकि भारतीय जनता पार्टी के लिए अवसर बन सकता है. हालांकि, बंगाल में एग्जिट पोल के बार-बार गलत साबित होने का इतिहास भी है. इसके साथ ही हरकारा डीप डाइव के इस एपिसोड में प्रोफेसर अपूर्वानंद के साथ पश्चिम बंगाल चुनाव, मतदाता सूची, और लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका पर गहन चर्चा की.

