श्रवण गर्ग | अब तो बच्चों को भी पता चल गया कि सत्ता कितनी क्रूर है !
वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग का विश्लेषण: जंतर-मंतर छात्र आंदोलन के बाद पंद्रह साल की बच्ची पर पुलिस कार्रवाई, ट्रोलिंग और सत्ता के भय पर उठते गंभीर सवाल.
राकेश कायस्थ | देश ने देखी तबाही प्रधानमंत्री ने सुनी सिर्फ गाली!
राकेश कायस्थ का विशेष विश्लेषण: जानिए कैसे छात्र आंदोलन और गालियों के शोर पर पीएम मोदी की इंस्टाग्राम रील और युवा असंतोष पर तीखे सवाल खड़े हुए.
श्रवण गर्ग | सड़कों पर उतरा हुआ मुल्क वापस घर नहीं लौटता !
वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग का विशेष लेख. नीट पेपर लीक और छात्र आंदोलन के दबाव में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर विश्लेषण—जानिए क्यों जंतर-मंतर खाली होने के बाद भी खत्म नहीं हुआ है जनाक्रोश.
राकेश कायस्थ | अमृतकाल के अ-राजनीतिक चोट्टे
लेखक राकेश कायस्थ का तीखा राजनीतिक विश्लेषण. सोनम वांगचुक के अनशन, शिक्षा व्यवस्था के निजीकरण, डिजिटल युग में विपक्ष की भूमिका और जंतर-मंतर छात्र आंदोलन पर विस्तार से चर्चा.
अजित साही | यह नाराज़गी पिछले दस दिनों में पैदा नहीं हुई है. यह वर्षों से लोगों के भीतर जमा असंतोष का विस्फोट है.
'हरकारा डीप डाइव' में वरिष्ठ पत्रकार अजित साही और निधीश त्यागी का विशेष विश्लेषण. जंतर-मंतर छात्र आंदोलन, मोदी सरकार की चुनौतियाँ, वैश्विक तानाशाही व्यवस्थाओं के पैटर्न और भारत में उभरती जेन-ज़ी बगावत पर गहराई से चर्चा.
राकेश कायस्थ | ये डिक्टेटरशिप का आखिरी दौर है
लेखक राकेश कायस्थ का तीखा राजनीतिक विश्लेषण. 2014 से 2026 तक मोदी सरकार की नीतियों, क्रोनी कैपिटलिज्म, विपक्ष और देश में जारी लोकतांत्रिक असंतोष पर विस्तार से चर्चा.
उनके परिवार भाजपा का समर्थन करते हैं, लेकिन वे अपने अधिकारों के लिए भाजपा नीत सरकार से लड़ने दिल्ली में हैं
‘पीटीआई’ की भावुक ग्राउंड रिपोर्ट. घर से बिना बताए दिल्ली पहुँचे प्रयागराज और मुंबई के किशोर; भगत सिंह और आंबेडकर के आदर्शों के साथ जंतर-मंतर पर डटे प्रदर्शनकारी.
व्हाट्सएप पीढ़ी ने आज की भाजपा बनाई; इंस्टाग्राम पीढ़ी उसे चुनौती दे रही है
'द हिंदू' में वर्गीज के. जॉर्ज का विशेष विश्लेषण. व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम पीढ़ी के बीच का अंतर कैसे भारतीय राजनीति, छात्र आंदोलन और सरकार की रणनीतियों को प्रभावित कर रहा है.वर्गीज के जॉर्ज द हिंदू 2026
दिल्ली की सड़कों ने बताया-“भारत गुस्से में है”. पर हम अब भी गलत सवाल क्यों पूछ रहे हैं?
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में वैष्णवी सिन्हा और स्वप्निल जोगलेकर का विश्लेषणात्मक लेख. कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के डिजिटल मीम से धरातल पर उतरे छात्र आंदोलन, मुख्यधारा मीडिया की भूमिका और नागरिक अधिकारों पर विशेष टिप्पणी.
चोट के निशान, फटे लिगामेंट और न झुकने का संकल्प: संसद मार्च के बाद वापस लौटे छात्र
‘द टेलीग्राफ’ में देबायन दत्ता की रिपोर्ट. संसद मार्च में पुलिस लाठीचार्ज के बाद घायल छात्र फिर जंतर-मंतर पर लौटे; चंदन, अंजलि और तन्वी का संकल्प और आंखों देखी दास्तान.

