गिल्स वर्नियर्स | पार्टी का खेल बिगाड़ने वाले मतदाताओं की पसंद को खारिज कर रहे हैं
"राजनीतिक वैज्ञानिक गिल्स वर्नियर्स के इस विशेष वैचारिक लेख में अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसदों द्वारा पाला बदलकर एनडीए (NDA) को समर्थन देने की अटकलों के बीच भारतीय राजनीति में बढ़ते दलबदल संकट का गहरा विश्लेषण किया गया है. लेखक ने महाराष्ट्र (शिवसेना-एनसीपी), मध्य प्रदेश, कर्नाटक और गोवा के उदाहरणों के जरिए स्पष्ट किया है कि सामूहिक इस्तीफे और विभाजन कभी स्वतःस्फूर्त नहीं होते, बल्कि इनके पीछे सत्ताधारी दल (BJP) की सुनियोजित इंजीनियरिंग होती है. लेख में पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के क्रूर क्षेत्रीय कारक, कमजोर वैचारिक आधार, व्यावसायिक राजनीति, दलबदल विरोधी कानून (1985) की कानूनी खामियों और लोकसभा व राज्यसभा के संसदीय गणित पर इसके दूरगामी लोकतांत्रिक प्रभावों का विस्तृत ब्योरा दिया गया है.
तृणमूल के 28 में से 20 लोकसभा सांसदों ने स्पीकर से कहा- हम एनडीए में शामिल होना चाहते हैं
द इंडियन एक्सप्रेस’ और ‘द हिंदू’ की इस संयुक्त ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) में अब तक का सबसे बड़ा विभाजन हो गया है. सीनियर नेता काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में 28 में से 20 लोकसभा सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर एनडीए (NDA) का हिस्सा बनने की इच्छा जताई है. यह राजनीतिक घटनाक्रम केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के दिल्ली स्थित आवास और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की मौजूदगी में हुई बैठक के बाद सामने आया है. ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की 'इंडिया' गठबंधन बैठक के बीच दिल्ली में हुए इस तख्तापलट, बागी सांसदों (शर्मिला सरकार, शताब्दी रॉय, प्रसून बनर्जी) के बयानों और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में विधायकों की बगावत की पूरी क्रोनोलॉजी यहाँ पढ़ें.
मोदी का ‘विपक्ष-मुक्त’ भारत: दिल्ली दरबार ने बंगाल में सत्ता परिवर्तन की पटकथा कैसे रची
वरिष्ठ पत्रकार पी. रमन ने 'द वायर' में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव परिणामों का तीखा विश्लेषण किया है. उन्होंने बताया कि कैसे 2.5 लाख केंद्रीय बलों की तैनाती, गोदी मीडिया की चुप्पी और सुवेन्दु अधिकारी के नेतृत्व में बंगाल अब पूरी तरह दिल्ली (अमित शाह) के अधीन हो गया है. पढ़ें अनुदित सारांश.
परकला प्रभाकर: ‘हर राजनीतिक दल का भाजपाकरण हो जाएगा’
चुनावों के पीछे की प्रक्रिया और 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. जाने-माने राजनीतिक विश्लेषक और एसआईआर के प्रखर आलोचक परकला प्रभाकर का मानना है कि ये चुनाव केवल हार-जीत का आंकड़ा नहीं हैं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र के बुनियादी ढांचे में बदलाव का संकेत हैं.
इंडिया गठबंधन के लिए आगे क्या?
वर्तमान स्थिति में, जहाँ विपक्ष सत्तारूढ़ पार्टी और केंद्रीय प्रशासन से अस्तित्वगत चुनौतियों का सामना कर रहा है, पहला उपाय यह है कि भारत गठबंधन को अपने स्वयं के संसाधनों और क्षमताओं को पहचानना होगा और उन्हें एक प्रभावशाली ताकत में बदलना होगा.
ममता बनर्जी और अन्य 31 सीटों पर ‘एसआईआर’ के कारण कम जीत के अंतर पर नई याचिकाएं दायर कर सकते हैं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अन्य लोग अपने इस आरोप पर नए आवेदन दायर करने के लिए स्वतंत्र हैं कि कई विधानसभा क्षेत्रों में जीत का अंतर, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान हटाए गए वोटों की संख्या से कम था.
ममता के इस्तीफे से इनकार के बाद राज्यपाल ने विधानसभा भंग की
ममता बनर्जी द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह कहे जाने के दो दिन बाद कि वह मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगी, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आर.एन. रवि ने 7 मई से राज्य विधानसभा को भंग कर दिया है. मौजूदा विधानसभा का गठन मई 2021 में हुआ था, जब ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस राज्य में लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटी थी.
बंगाल: मछली और झींगा भी मुद्दा; डेल्टा क्षेत्र के बड़े दांव वाले चुनाव में जीविका और वफादारी का असर
बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में 'मछली' मुख्य केंद्र बिंदु रही है. इसकी शुरुआत तब हुई जब तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा को एक 'बोहिरागतो' (बाहरी) शक्ति के रूप में प्रचारित किया जो शाकाहार थोप देगी, और देखते ही देखते यह अभियान उस समय और तेज हो गया जब नरेंद्र मोदी और ममता बनर्जी मछली उत्पादन के आंकड़ों को लेकर आमने-सामने आ गए.

