कुंभ में चरम पर पहुंची लूट, चंपत राय को पहले से पता था — मगर एफ़आईआर नहीं हुई
हिंदुत्ववादी संगठन के लिए राम मंदिर में कथित गबन उसके अपने अभियान में एक शर्मिंदा करने वाला 'सेल्फ़ गोल' है — वही अभियान जिसमें हिंदू मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से "मुक्त" कराने की मांग की जाती रही है. मंदिरों को श्रद्धालुओं को सौंपने की मांग के बाद अब उसे समझाना पड़ रहा है कि सरकारी निगरानी से जुड़े एक ट्रस्ट के तहत चंदा कैसे ग़ायब हो गया. ट्रस्ट में चार पदेन वरिष्ठ सरकारी अधिकारी इसे सीधे केंद्र सरकार — प्रधानमंत्री कार्यालय और गृह मंत्रालय समेत — से जोड़ते हैं, जबकि एक सदस्य उत्तर प्रदेश सरकार का प्रतिनिधित्व करता है.
लेकिन सियासी साया संभालना और मुश्किल है. ब्लूमबर्ग का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से क़रीबी तौर पर जुड़े एक हिंदू मंदिर में कथित वित्तीय अनियमितताएं उनकी पार्टी की एक प्रमुख परियोजना की छवि पर दाग़ लगाने का ख़तरा बन गई हैं.
राम मंदिर ‘चढ़ावा चोरी’: फुटेज में 5 मुख्य आरोपी नकदी के बंडल हटाते और छुपाते दिखे
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में दीप्तिमान तिवारी की रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर के तीर्थयात्री सुविधा केंद्र के 45 दिनों के फुटेज की गहन जांच से पता चला है कि गिनती करने वाले पांच कर्मी नोटों के बंडल हटाकर उन्हें अपने कपड़ों या मोजों में छुपा रहे थे.
इस बीच, जिस एजेंसी के माध्यम से इन कर्मियों को काम पर रखा गया था, उसने दावा किया है कि उसने इन लोगों की तलाश खुद नहीं की थी, बल्कि इन नामों की सिफारिश भारतीय स्टेट बैंक द्वारा की गई थी, जहां दान का पैसा जमा किया जाता था. पुलिस ने दान का पैसा हटाते हुए दिखे आरोपियों से जुड़े परिसरों की तलाशी ले ली है और नकदी बरामद की है. पुलिस अब तक करीब 80 लाख रुपये बरामद कर चुकी है. ट्रस्ट ने मंदिर की विभिन्न हुंडियों (दानपात्रों) में डाले गए नोटों और सिक्कों की गिनती के लिए लगभग 50 लोगों को लगाया था.
सुशांत सिंह : कितना महंगा पड़ेगा तेल अवीव की तरफ मोदी सरकार का झुकाव, ईरान अमेरिका जंग की छाया में ?
अमेरिका-ईरान युद्ध की समाप्ति के बाद ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान की पहली विदेश यात्रा 23 जून को इस्लामाबाद की थी — पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर को एमओयू पर दस्तख़त कराने में मध्यस्थता के लिए शुक्रिया कहने. अमेरिका ने भी शांति वार्ता में पाकिस्तान की भूमिका को सराहा — उपराष्ट्रपति जे.डी. वैंस ने स्विट्ज़रलैंड में ऐलान किया, "मुझे पाकिस्तान से मोहब्बत है." कैरवैन पत्रिका में प्रकाशित रक्षा और अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ सुशांत सिंह के इस तीखे विश्लेषण का तर्क है कि इसी परिदृश्य में भारत की पश्चिम एशिया नीति की नाकामी पूरी तरह उघड़ गई है.
सिर्फ चंपत नहीं हैं मंदिर के ट्रस्ट में, और कौन लोग हैं ?
‘द वायर’ के मुताबिक, 14 सदस्यों में से नौ के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के साथ करीबी संबंध हैं और वे राम मंदिर आंदोलन के लिए महत्वपूर्ण रहे हैं. ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, जो वर्तमान में विवादों/आरोपों के घेरे में हैं, लेकिन अभी तक उन पर कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई है और न ही उनका इस्तीफा स्वीकार किया गया है, उन्हें पीएम मोदी का विशेष रूप से करीबी माना जाता है. वह आरएसएस के विंग 'विश्व हिंदू परिषद' (वीएचपी) से हैं और कभी गुजरात के दिनों से मोदी के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे प्रवीण तोगड़िया के करीबी थे. तोगड़िया ने चंपत राय के साथ अपने "30 साल पुराने जुड़ाव" की गवाही दी थी, जब पांच महीने पहले तोगड़िया पहली बार राम मंदिर देखने गए थे. चंपत राय ने उन्हें खुद मंदिर का दौरा कराया था.
एम राजशेखर | ईरान युद्ध के दौरान भाग्य ने हमें बचाए रखा; किस्मत से यह संकट छोटा साबित हुआ
पिछले कुछ महीनों में भारत के ऊर्जा क्षेत्र को एक अभूतपूर्व 'स्ट्रेस टेस्ट' (तनाव परीक्षण) से गुजरना पड़ा है. भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए भारी मात्रा में पश्चिम एशिया पर निर्भर है; वह अपने तेल आयात का 40% हिस्सा 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' (हॉर्मुज जलडमरूमध्य) के रास्ते प्राप्त करता था. इसके अतिरिक्त, भारत कुल तेल का 50% से अधिक, एलएनजी का 60% और एलपीजी का 80% से अधिक हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करता था.
जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला किया, तो इस भू-राजनीतिक टकराव के कारण भारत की आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह बाधित हो गई. इसके परिणामस्वरूप वैश्विक बाजारों में कड़ाई आई, जिससे भारत को तेल, गैस और उनसे जुड़े औद्योगिक उत्पादों की भारी कमी तथा कीमतों में तीव्र उछाल का सामना करना पड़ा.
वीवीपी शर्मा : राम रहस्यमय तरीकों से काम करते हैं; लेकिन उनके हिसाब-किताब रखने वाले शायद नहीं
वरिष्ठ पत्रकार वीवीपी शर्मा का विशेष वैचारिक लेख. अयोध्या राम मंदिर में दान प्रबंधन को लेकर छिड़े विवाद, एसआईटी (SIT) जांच और आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के मद्देनजर धार्मिक आस्था बनाम वित्तीय जवाबदेही पर एक तीखा और गहरा विश्लेषण.
जन्मजात नागरिकता खत्म करने के प्रयास पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की रोक, लेकिन ट्रम्प के तेवर कड़े
'रॉयटर्स' की रिपोर्ट. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका. कोर्ट ने जन्मजात नागरिकता (Birthright Citizenship) को खत्म करने के कार्यकारी आदेश पर रोक लगाई; ट्रम्प ने कांग्रेस से कानून बनाने की अपील की.
मणिपुर में ‘आर्थिक नाकेबंदी’ के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज, कुकी-ज़ो समूहों ने ‘बफर जोन’ में घुसने की कोशिश की
'द इंडियन एक्सप्रेस' की सुकृता बरुआ और जिमी लेइवोन की रिपोर्ट. मणिपुर के कांगपोकपी में आवश्यक वस्तुओं की किल्लत और नागा समूहों की आर्थिक नाकेबंदी के खिलाफ कुकी-ज़ो प्रदर्शनकारियों का मार्च; बफर जोन में सुरक्षा बलों ने दागे आंसू गैस के गोले.
‘और मैं ऐसा नहीं चाहता’: सोनम वांगचुक ने नीट विरोध प्रदर्शनों पर ‘बांग्लादेश, नेपाल’ जैसे हालात बनने की चेतावनी दी
लद्दाख स्वायत्तता और राष्ट्रीय परीक्षा घोटालों (Paper Leak) के खिलाफ जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक का आमरण अनशन जारी. देबायन दत्ता की रिपोर्ट के अनुसार गिरते स्वास्थ्य के बीच वांगचुक ने सरकार को बांग्लादेश-नेपाल जैसी छात्र अशांति की चेतावनी दी.
‘मानवता एक ऐसा विशेषाधिकार है जो मुझ जैसे लोगों को नहीं मिलता’: तिहाड़ जेल से उमर खालिद
'द गार्जियन' (The Guardian) में हन्ना एलिस-पीटरसन द्वारा लिया गया उमर खालिद का विशेष इंटरव्यू. जानिए तिहाड़ जेल के कैदी नंबर 626714 की दर्दभरी कहानी, यूएपीए (UAPA) कानून और राजनीतिक खामोशी पर उनका दर्द.
सुशांत सिंह | दोहरी मुसीबत
सामरिक मामलों के जानकार सुशांत सिंह का विशेष लेख. 'ग्लोबल साउथ' में चीन के बढ़ते आर्थिक प्रभाव, गाजा संकट पर भारत के रुख और अमेरिकी सैन्य कमांड से 'इंडो' शब्द हटाए जाने के बीच मोदी सरकार की विदेश नीति और रणनीतिक चुनौतियों का तीखा विश्लेषण.
2003 में आपके पिता ने कहाँ वोट दिया था? एसआईआर में लेगेसी दस्तावेज़ों की मांग का कानूनी आधार क्यों नहीं है
'स्क्रोल' की रिपोर्ट. चुनाव आयोग की 'एसआईआर प्रक्रिया' (SIR) के तहत 2003 की वोटर लिस्ट को आधार बनाने और पैतृक संबंध (Legacy Link) की मांग पर बड़ा विवाद. जानिए आम मतदाताओं को हो रही कानूनी और प्रशासनिक परेशानियां.
हिंदी में लिखे कोर्ट के फैसले राष्ट्रीय बहस से क्यों गायब हो जाते हैं?
'द इंडियन एक्सप्रेस' की अंजलि मरार की रिपोर्ट. जून में 43% से अधिक की कमी के साथ भारत में इतिहास के सबसे सूखे मानसून की आशंका. अल नीनो (El Nino) के प्रभाव और चक्रवात न बनने से बुवाई और फसलों पर बड़ा संकट.
जून, 1901 के बाद से पाँचवाँ सबसे सूखा महीना; जुलाई में उत्तर के कुछ हिस्सों में मानसून के आगे बढ़ने की संभावना
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मानसून की कमजोर शुरुआत के बाद किसानों ने धान, कपास और सोयाबीन की बुवाई घटाई
'रॉयटर्स' की रिपोर्ट. कमजोर मानसून की शुरुआत के कारण देश में अब तक सामान्य से 42% कम बारिश, जिससे धान, सोयाबीन और कपास सहित खरीफ फसलों की बुवाई में 23% की भारी गिरावट दर्ज की गई है.
संजय बारू | भारत-चीन रणनीतिक आर्थिक वार्ता को फिर से शुरू करने का समय आ गया है
'द इंडियन एक्सप्रेस' में प्रकाशित संजय बारू के विशेष लेख का हिंदी अनुवाद. भारत-चीन संबंधों में हालिया नरमी के बीच सीमा विवाद से इतर 'आर्थिक सुरक्षा वार्ता' को पुनर्जीवित करने और अमेरिका के व्यापारिक रुख को देखते हुए व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने पर गहरा विश्लेषण.
‘एसआईआर प्रक्रिया’ पर सीजेआई को पत्र लिखने वाले 23 दलों में डीएमके और आप भी शामिल, चुनाव आयोग का ‘पक्षपातपूर्ण रवैया’ रेखांकित
'पीटीआई' और 'द टेलीग्राफ वेब डेस्क' की रिपोर्ट. चुनाव आयोग की 'एसआईआर प्रक्रिया' (SIR) और निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए 23 विपक्षी दलों और कपिल सिब्बल ने मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत को संयुक्त पत्र भेजा; जयराम रमेश और डेरेक ओ'ब्रायन ने दी जानकारी.
बंगाल विधानसभा में ओबीसी संशोधन विधेयक पारित, 77 मुस्लिम समुदाय ओबीसी सूची से बाहर
‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ की रिपोर्ट. पश्चिम बंगाल विधानसभा ने ओबीसी आरक्षण से जुड़े दो बड़े संशोधन विधेयक पारित किए. कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश के बाद 77 मुस्लिम समुदायों को ओबीसी सूची से हटाया गया, ओबीसी कोटा 17% से घटकर 7% हुआ.
विपक्ष-मुक्त भारत? पाला बदलने के खेल से प्रमुख दलों को लगा झटका, भाजपा ने बड़े विधेयकों के लिए फिर तेज की मुहिम
'द टेलीग्राफ' के अर्नब गांगुली की विशेष राजनीतिक रिपोर्ट. जून 2026 में विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन को बड़ा झटका; तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 और उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) के 6 सांसदों के पाला बदलने से एनडीए (NDA) की बढ़ी ताकत.
आकार पटेल | अधिकारों पर भारी नियम
वरिष्ठ पत्रकार और लेखक आकार पटेल का विशेष वैचारिक लेख. गैर-सरकारी संगठनों (NGO) और विदेशी फंडिंग (FCRA) पर संसदीय सहमति के बिना केवल नियमों में बदलाव कर मोदी सरकार द्वारा की जा रही सख्ती और उसके लोकतांत्रिक प्रभावों का गहरा विश्लेषण.

