“कोई भी इस बात से इनकार नहीं कर सकता कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार है, जज कोई ‘होली काउ’ नहीं हैं”: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने अभिनेता सूर्या और तृषा की तमिल फिल्म ‘करुप्पु’ पर प्रतिबंध लगाने की याचिका को खारिज करते हुए एक ऐतिहासिक टिप्पणी की है. जस्टिस जीआर स्वामीनाथन और जस्टिस वी लक्ष्मीनारायणन की पीठ ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका आलोचना से ऊपर नहीं है और कलात्मक अभिव्यक्ति (Artistic License) का सम्मान किया जाना चाहिए. एनसीईआरटी (NCERT) विवाद के संदर्भ में कोर्ट के इस बड़े फैसले को पूरा पढ़ें.
ये दिन आ गए..! नीट की 21 जून को होने वाली परीक्षा के लिए भारतीय वायु सेना की सेवाएं लेने पर विचार
सौरभ त्रिवेदी की रिपोर्ट के अनुसार, 21 जून 2026 को होने वाली नीट-यूजी की पुनर्परीक्षा को सुरक्षित ढंग से कराने के लिए सरकार अब भारतीय वायु सेना की सेवाएं लेने पर विचार कर रही है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आवास पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ हुई उच्च स्तरीय बैठक में पेपर लीक के जोखिम को शून्य करने के लिए वायु सेना के रसद (लॉजिस्टिक्स) और परिवहन तंत्र का उपयोग करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है. सीबीआई जांच और 11 गिरफ्तारियों के बीच पढ़ें पूरी रिपोर्ट.
भंवर मेघवंशी | राजनीति में जो गाय जिंदा है,वह जमीन पर मर रही है!
‘जैसलमेर की वे तस्वीरें किसी सभ्य समाज के चेहरे पर कालिख की तरह चिपक जानी चाहिए थीं. गर्मी,भूख,प्यास, लापरवाही और सिस्टम की संवेदनहीनता ने उन्हें मार डाला,लेकिन यह देश अजीब है.यहां गाय की लाश पर राजनीति होती है,गाय के जीवन पर नहीं.’ पढ़ें सुपरिचित सामाजिक कार्यकर्ता भंवर मेघवंशी का पूरा आलेख…
ईरान के बीच समझौता हुआ, लेकिन ट्रंप की अंतिम मंजूरी बाकी
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे भीषण संघर्ष को रोकने के लिए वार्ताकारों ने 60 दिनों के संघर्षविराम विस्तार और परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत शुरू करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर सहमति बना ली है. हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अंतिम मंजूरी और ईरान की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है. अपनी ही पार्टी के ईरान-विरोधी कट्टरपंथियों के दबाव के बीच ट्रंप के इस बड़े फैसले और वैश्विक भू-राजनीति पर इसके असर पर पढ़ें पूरी रिपोर्ट.
भाजपा को परेशान करता ‘कॉकरोच’: कैसे एक मज़ाकिया ‘कॉकरोच पार्टी’ चेतावनी बन गई है
द टेलीग्राफ में प्रकाशित परन बालकृष्णन के लेख के अनुसार, एक इंटरनेट मज़ाक के रूप में शुरू हुई 'कॉकरोच जनता पार्टी' अब इंस्टाग्राम पर 22.7 मिलियन फॉलोअर्स के साथ एक बड़े डिजिटल आंदोलन में बदल चुकी है. सीजेआई सूर्यकांत की एक कथित टिप्पणी के बाद उपजे इस 'मीम ट्रेंड' को बीजेपी जहां सीमा पार की साजिश बता रही है, वहीं अर्थशास्त्री इसे देश में 40% के करीब पहुंच चुकी शिक्षित युवा बेरोजगारी, अग्निवीर योजना, आईटी मंदी और सिकुड़ते अवसरों से उपजा वास्तविक जनाक्रोश मान रहे हैं. पढ़ें पूरा राजनीतिक-आर्थिक विश्लेषण.
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट का निष्कर्ष: अगले पांच वर्षों में वैश्विक तापमान रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच सकता है
संयुक्त राष्ट्र की मौसम एजेंसी और ब्रिटेन के मौसम कार्यालय की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, साल 2026 से 2030 के बीच वैश्विक तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने का अनुमान है. रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि प्रशांत महासागर में सक्रिय हो रहे मजबूत 'अल नीनो' के कारण तापमान पेरिस समझौते की 1.5°C की सीमा को पार कर जाएगा, जिससे आर्कटिक की बर्फ तेजी से पिघलेगी और अमेज़ॅन में भीषण सूखा व उत्तरी यूरोप में भारी बाढ़ जैसे गंभीर संकट आ सकते हैं. ब्रिटिश वैज्ञानिक मेलिसा सीब्रुक के विश्लेषण के साथ पढ़ें पूरी रिपोर्ट.
‘अविश्वसनीय; पहले जंगल काटे, अडानी को सौंपे और अब गर्मी पर लेक्चर दे रहे हैं’: मोदी की एडवाइजरी की आलोचना
द टेलीग्राफ वेब डेस्क की रिपोर्ट के अनुसार, भीषण गर्मी के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नागरिकों को पानी पीने और सावधानी बरतने की सलाह देने पर सोशल मीडिया पर तीखा विवाद छिड़ गया है. आलोचकों ने हसदेव और अरावली के जंगलों की कटाई, दिल्ली के पानी संकट और मंत्रियों के बड़े काफिलों का हवाला देते हुए सरकार की पर्यावरण नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं. देश में गर्मी से हुई मौतों के आंकड़ों के साथ पढ़ें यह पूरी रिपोर्ट.
एस.वाई. कुरैशी | सुप्रीम कोर्ट का फैसला कानूनी तौर पर सही, पर ज़मीनी हकीकत के मामले में लगभग पूरी तरह गलत
भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई. कुरैशी ने 'द इंडियन एक्सप्रेस' में चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को सही ठहराने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले की गंभीर समीक्षा की है. उनका मानना है कि मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत का यह फैसला संवैधानिक रूप से सही होने के बावजूद ज़मीनी हकीकत से दूर है, क्योंकि यह गरीब और प्रवासी मतदाताओं को अदालती चक्करों में उलझाकर व्यावहारिक रूप से मताधिकार से वंचित कर देता है. पढ़ें पूरा लेख.
भारत में घट रही आबादी की रफ्तार, जन्म दर 2.1 से नीचे पहुंची
सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम की सांख्यिकीय रिपोर्ट के अनुसार, भारत की कुल प्रजनन दर रिप्लेसमेंट लेवल (2.1) से नीचे गिरकर 1.9 पर पहुंच गई है. 'डाउन टू अर्थ' के इस जनसांख्यिकीय विश्लेषण में जानिए कैसे दिल्ली (1.2 TFR) और बिहार (2.9 TFR) के बीच की क्षेत्रीय असमानता भविष्य की राजनीति, अर्थव्यवस्था और लोकसभा सीटों के बंटवारे को प्रभावित कर सकती है.
“मुझे अपने घर में मरने दो”: बांग्लादेश से लौटने के बाद ‘पुशबैक’ की पीड़ा से जूझ रही असम की एक महिला
असम के बरपेटा जिले की 68 वर्षीय अमीना बेगम की कहानी नागरिकता, पहचान और मानवीय त्रासदी का एक जीवंत दस्तावेज है. फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल और गुवाहाटी हाईकोर्ट द्वारा 'विदेशी' घोषित किए जाने, डिटेंशन सेंटर में चार साल काटने और फिर रात के अंधेरे में बंदूक की नोक पर बांग्लादेश सीमा पार धकेले जाने (पुशबैक) के बाद जैसे-तैसे घर लौटी एक बुजुर्ग महिला के खौफ और बेबसी पर पढ़ें पूरी रिपोर्ट.
श्रवण गर्ग | नेहरू के पुण्य स्मरण के बहाने ‘भारतीयता’ की खोज
वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक टिप्पणीकार श्रवण गर्ग ने पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा प्रतिपादित 'भारतीयता' के विचार और वर्तमान राजनीतिक-सामाजिक परिदृश्य का एक मर्मस्पर्शी विश्लेषण किया है. लेखक ने साल 2019 के एक मशहूर ऑनलाइन फूड डिलीवरी विवाद (खाने का कोई धर्म नहीं होता) को याद करते हुए बताया है कि कैसे वे ऐतिहासिक संकेत आज 2026 के भारत में सच साबित हो रहे हैं, जहाँ इतिहास बदलने के साथ-साथ नागरिकों की पहचान और अधिकारों की परिभाषा भी बदली जा रही है. पढ़ें पूरा लेख.
भारत का आरोप: पर्नोड ने कम टैरिफ देने के लिए स्कॉच की संरचना और उम्र की जानकारी छिपाई
रॉयटर्स और अदालती दस्तावेजों के अनुसार, मशहूर फ्रांसीसी शराब कंपनी पर्नोड रिकॉर्ड (Pernod Ricard) भारत में ₹2,600 करोड़ ($314 मिलियन) की भारी टैक्स कानूनी लड़ाई में फंस गई है. भारतीय जांचकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला है कि चिवास रीगल और एब्सोल्यूट वोदका बनाने वाली इस कंपनी ने कम टैरिफ देने के लिए अपनी आयातित स्कॉच व्हिस्की की उम्र, संरचना और वास्तविक कीमत को छुपाया. दिल्ली हाईकोर्ट में जमा दस्तावेजों के साथ पढ़ें इस विवाद का पूरा विवरण.
ईरान युद्ध के कारण खाड़ी देशों को बासमती का निर्यात प्रभावित, भारत के चावल निर्यात में गिरावट
रॉयटर्स (राजेंद्र जाधव) की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2026 के पहले चार महीनों में भारत के चावल निर्यात में मामूली गिरावट दर्ज की गई है. अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग बीमा और माल ढुलाई लागत बढ़ने से खाड़ी देशों को जाने वाला प्रीमियम बासमती निर्यात 7% तक गिर गया है. वैश्विक चावल बाजार में 40% हिस्सेदारी रखने वाले भारत के निर्यात और रिकॉर्ड पैदावार के कारण घरेलू कीमतों पर बढ़ते दबाव पर पढ़ें पूरी रिपोर्ट.
हवाई ईंधन की ऊंची कीमतों के कारण इंडिगो और एयर इंडिया ने जून-जुलाई की घरेलू उड़ानों में की कटौती
ईरान युद्ध के बाद विमान ईंधन की कीमतों में आई भारी तेजी के कारण भारत की दो सबसे बड़ी एयरलाइनों—इंडिगो और एयर इंडिया ने जून और जुलाई के लिए अपनी घरेलू उड़ानों में क्रमशः 10% और 22% तक की भारी कटौती की है. जागृति चंद्रा और रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों कंपनियां मिलकर रोजाना लगभग 250 उड़ानें कम करेंगी, जिससे व्यस्त सीजन में हवाई किराए बढ़ेंगे. इसी बीच हुंडई मोटर इंडिया ने भी 1 जून से अपनी कारों के दाम ₹12,800 तक बढ़ाने का फैसला किया है. पढ़ें पूरी बिजनेस रिपोर्ट.
‘भाजपा तय करेगी कि कौन वोट दे सकता है और कौन नहीं’: सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर याचिकाकर्ता योगेंद्र यादव
राजनीतिक कार्यकर्ता और चुनाव विश्लेषक योगेंद्र यादव ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को सही ठहराने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. 'हिंदुस्तान टाइम्स' के अनुसार, इस मामले में याचिकाकर्ता रहे यादव ने आरोप लगाया कि अदालत संवैधानिक सिद्धांतों की जांच करने से पीछे हट गई है. उन्होंने दावा किया कि इस फैसले के बाद करोड़ों नागरिकों के मताधिकार से वंचित होने का खतरा है और लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा करने वाला आखिरी स्तंभ भी टूट गया है. पढ़ें पूरी रिपोर्ट.
सुप्रीम कोर्ट ने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की दिशा में एसआईआर प्रक्रिया को सही ठहराया
द हिंदू (कृष्णदास राजगोपाल) की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को संवैधानिक रूप से वैध ठहराया है. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें SIR को पिछले दरवाजे से नागरिकता की जांच का जरिया बताया गया था. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 324 के तहत निष्पक्ष चुनाव के लिए मतदाताओं के दस्तावेजी सत्यापन की मांग पूरी तरह उचित है. पढ़ें कोर्ट का पूरा फैसला.
विदेशी निवेशकों के बाजार छोड़ने से, एक भारतीय शेयरों में पहली वार्षिक गिरावट की आशंका
प्रणॉय कृष्ण की रिपोर्ट और रॉयटर्स के नवीनतम पोल के अनुसार, भारतीय शेयर बाजार एक दशक से भी अधिक समय में अपनी पहली वार्षिक गिरावट की ओर अग्रसर है. साल 2026 में विदेशी निवेशकों (FIIs) द्वारा 23 बिलियन डॉलर की रिकॉर्ड पूंजी निकासी, महंगे पी/ई (P/E) रेशियो और वैश्विक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्रांति में भारत की सीमित भागीदारी ने बाजार को संकट में डाल दिया है. रजत अग्रवाल और किशन गुप्ता के विश्लेषण के साथ पढ़ें पूरी रिपोर्ट.
अरविंद सुब्रमण्यन | निवेश बढ़ाने के लिए शीर्ष पर बैठे लोगों को बदलें
भारत सरकार के पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) अरविंद सुब्रमण्यन ने 'द इंडियन एक्सप्रेस' में गिरते रुपये और सुस्त निजी निवेश के संकट पर गंभीर नीतिगत विश्लेषण प्रस्तुत किया है. उनके अनुसार, साल 2022 से फरवरी 2026 के बीच आरबीआई (RBI) के भारी हस्तक्षेप के बाद भी रुपये में 20% से अधिक की गिरावट आई है, जो केवल ईरान युद्ध नहीं बल्कि नीतिगत अविश्वास का नतीजा है. जानिए क्यों वे कमान संभाल रहे नौकरशाहों और मंत्रियों को बदलने की वकालत कर रहे हैं.
“एक उत्तर पुस्तिका, एक छात्र और पूरा आईटी सेल”: कैसे सीबीएसई की गड़बड़ी बताने वाले छात्र को ‘पाकिस्तानी’ बना दिया गया
वरिष्ठ पत्रकार निधीश त्यागी और युवा पत्रकार विश्वजीत कुमार ने सीबीएसई की नई ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली के कारण मई 2026 में हजारों छात्रों के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ पर बात की है. 12वीं के छात्र वेदांत श्रीवास्तव द्वारा फिजिक्स की उत्तर पुस्तिका में लिखावट मिसमैच होने का दावा करने पर सोशल मीडिया ट्रोलर्स ने उसे 'पाकिस्तानी' और 'देश विरोधी' घोषित कर दिया था, लेकिन बाद में बोर्ड ने तकनीकी गड़बड़ी स्वीकार कर ली. राहुल गांधी और दिग्विजय सिंह द्वारा उठाए गए सवालों तथा पोर्टल में 'मास्टर पासवर्ड' जैसी सुरक्षा खामियों पर पढ़ें यह विशेष एक्सप्लेनर.
“कॉकरोच जनता पार्टी” पर इंडिया ब्लॉक में उत्साह, लेकिन कांग्रेस क्यों बना रही दूरी?
वेब पोर्टल 'स्क्रोल' की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, सोशल मीडिया पर उभरी 'कॉकरोच जनता पार्टी' को लेकर इंडिया ब्लॉक के भीतर वैचारिक मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं. जहां अखिलेश यादव और तृणमूल कांग्रेस जैसे क्षेत्रीय दल इस डिजिटल आंदोलन को युवाओं के गुस्से की सही अभिव्यक्ति मानकर इसका समर्थन कर रहे हैं, वहीं कांग्रेस इसे केवल एक अस्थायी 'इंटरनेट फैड' मानकर दूरी बनाए हुए है. पढ़ें राजनीतिक समीकरणों का पूरा विश्लेषण.

