अभिजीत दिपके के राजनीतिक कदमों से बढ़ी चिंताओं के बीच परिवार ने बदला ठिकाना
'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके के 6 जून 2026 को बोस्टन (अमेरिका) से दिल्ली आगमन और प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से ठीक पहले छत्रपति संभाजीनगर स्थित उनके परिवार ने सुरक्षा चिंताओं के कारण अस्थायी रूप से अपना ठिकाना बदल लिया है. अभिजीत के पिता भगवानराव दीपके (सेवानिवृत्त MIDC इंजीनियर) ने बताया कि घर पर पुलिस सुरक्षा बढ़ा दी गई है. इस बीच, मानवाधिकार अधिवक्ता असीम सरोदे ने खुलासा किया है कि अभिजीत नीट (NEET) विवाद और शिक्षा सुधारों को लेकर कानूनी दायरे में आंदोलन करने और अपनी गिरफ्तारी देने के लिए भी तैयार हैं. प्रकाश राज और सोनम वांगचुक जैसी हस्तियों के जुड़ाव पर पढ़ें पूरी रिपोर्ट
असम की महिला को बांग्लादेश में छोड़ आई पुलिस, एक साल बाद भी घर वापसी का इंतजार
‘स्क्रॉल’ के लिए रोकीबुज ज़मान की इस विशेष रिपोर्ट के अनुसार, असम के नलबाड़ी की रहने वाली 69 वर्षीय गोरिया मुस्लिम महिला सकीना बेगम पिछले एक साल से बांग्लादेश की राजधानी ढाका में फंसी हुई हैं. वर्ष 2012 में एक विदेशी न्यायाधिकरण (Foreigners Tribunal) द्वारा एकतरफा आदेश में विदेशी घोषित किए जाने और कोकराझार जेल व मटिया डिटेंशन सेंटर में वक्त बिताने के बाद उन्हें धुबरी सीमा से बांग्लादेश की तरफ धकेल दिया गया था. ढाका के एक स्थानीय परिवार द्वारा शरण दिए जाने, बिना वीजा प्रवेश के कारण बांग्लादेश की जेल में रहने और असमिया स्वदेशी नागरिकता की इस कानूनी त्रासदी पर पढ़ें पूरी रिपोर्ट.
भंवर मेघवंशी | चाहे दलित कार सेवा में चला जाए, राम मंदिर के लिए मर जाए... फिर भी उसे बराबरी नहीं मिलेगी
रकारा डीप डाइव’ के इस लाइव एपिसोड में निधीश त्यागी ने प्रसिद्ध लेखक और पूर्व संघ स्वयंसेवक भंवर मेघवंशी से राजस्थान के भीलवाड़ा (बराना गांव) के लोकदेवता मंदिर विवाद और गाय की राजनीति पर विस्तृत बातचीत की. मेघवंशी ने आरोप लगाया कि 400 साल पुराने दलित बलाई समुदाय के मंदिर पर आरएसएस और भाजपा से जुड़े लोगों ने नियंत्रण करने की कोशिश की और विरोध करने पर दलित परिवार से मारपीट की गई. जैसलमेर में गायों की मौत और गौशालाओं के अनुदान संकट को लेकर सरकार की नीतियों पर भंवर मेघवंशी का यह पूरा साक्षात्कार यहाँ पढ़ें.
‘अब अभिषेक को और स्वीकार नहीं कर सकते’: बागियों को मिल जाएगा तृणमूल का चुनाव चिन्ह एकनाथ शिंदे और अजित पवार की तरह
पश्चिम बंगाल की सत्ता से बाहर होने के महज एक महीने के भीतर तृणमूल कांग्रेस (TMC) गंभीर राजनीतिक विभाजन की कगार पर पहुंच गई है. रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि 4 मई को चुनावी हार के बाद ममता बनर्जी द्वारा विधायकों से अभिषेक बनर्जी को 'स्टैंडिंग ओवेशन' देने के दबाव और पार्टी नेतृत्व के अहंकार ने इस बगावत के बीज बोए थे. उलुबेरिया पूरब के विधायक ऋतब्रत बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी की दिल्ली मुलाकात के बाद अब टीएमसी के संसदीय दल में भी बड़ी फूट की आशंका जताई जा रही है. आई-पैक विवाद, कथित हस्ताक्षर जालसाजी और सीआईडी जांच के बीच तृणमूल कांग्रेस के इस बड़े संकट पर पढ़ें पूरी रिपोर्ट.
श्रवण गर्ग | राहुल गांधी पर हमला इसलिए भी हो रहा है क्योंकि वे एक पावरफुल प्रेजेंस हैं
‘हरकारा डीप डाइव’ के इस विशेष लाइव एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग और निधीश त्यागी ने राहुल गांधी पर लगातार बढ़ते राजनीतिक और रणनीतिक हमलों का गहराई से विश्लेषण किया है. रामचंद्र गुहा के हालिया लेख के संदर्भ में श्रवण गर्ग ने इसे 'कंकड़ फेंककर लहरें गिनने' की कोशिश बताया है. गर्ग के अनुसार, नीट परीक्षा घोटाले, बढ़ती बेरोजगारी, आर्थिक असमानता और बड़े कॉरपोरेट समूहों के प्रभाव पर राहुल गांधी के तीखे तेवरों से सत्ता और आर्थिक ताकतें असहज हैं, जिसके कारण उन्हें मुख्य विमर्श से हटाने की कोशिश की जा रही है. मजबूत विपक्ष और कांग्रेस के सांगठनिक बदलावों पर पढ़ें यह पूरा विश्लेषण.
हम सभी राजनीतिक दलों के लोगों को इस विरोध प्रदर्शन का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित करते हैं: सीजेपी
'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) ने आगामी आंदोलन को लेकर बुधवार 3 जून 2026 को अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की. संगठन के नवनियुक्त मुख्य प्रवक्ता और खोजी पत्रकार सौरव दास ने बताया कि सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके 6 जून की सुबह 8 बजे दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचेंगे. इसके बाद वे समर्थकों और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के साथ पार्लियामेंट स्ट्रीट होते हुए जंतर-मंतर जाएंगे, जहां नीट पेपर लीक और शिक्षा विभाग की खामियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की अनुमति मांगी जाएगी. संगठन ने इस प्रदर्शन में सभी राजनीतिक दलों को आमंत्रित किया है. पढ़ें पूरी रिपोर्ट.
कॉकरोच जनता पार्टी ने पत्रकार, फिल्ममेकर और मैकिन्से के पूर्व सलाहकार को प्रवक्ता नियुक्त किया
अभिजीत दिपके द्वारा स्थापित सोशल मीडिया आधारित संगठन 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) ने संगठनात्मक विस्तार करते हुए तीन नए प्रवक्ताओं की नियुक्ति की घोषणा की है. खोजी पत्रकार सौरव दास को संगठन का मुख्य प्रवक्ता बनाया गया है, जबकि आईआईटी कानपुर व एलएसई (LSE) के पूर्व छात्र आशुतोष रांका और फिल्ममेकर विजेता दहिया को भी प्रवक्ता की जिम्मेदारी दी गई है. 6 जून 2026 को नीट पेपर लीक और सीबीएसई डिजिटल मूल्यांकन विवाद को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के लिए दिल्ली में होने वाले शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन से पहले सीजेपी की इस नई रणनीति पर पढ़ें पूरी रिपोर्ट.
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट, आरबीआई ने 12 बिलियन डॉलर का सोना बेचा; लेकिन भारत सरकार ने इसे खारिज किया
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स की उस हालिया रिपोर्ट का पूरी तरह खंडन किया है, जिसमें दावा किया गया था कि भू-राजनीतिक तनाव और रुपये को सहारा देने के लिए मई के अंत में 12 अरब डॉलर का सोना बेचा गया है. बुधवार 3 जून 2026 को जारी आधिकारिक बयान में आरबीआई ने स्पष्ट किया कि देश का भौतिक स्वर्ण भंडार (Physical Gold Stock) 880.52 टन पर पूरी तरह अपरिवर्तित और स्थिर है. पश्चिम एशिया संकट, विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) और आरबीआई की इस आधिकारिक एडवाइजरी पर पढ़ें यह पूरी रिपोर्ट.
ममता बनर्जी की तृणमूल बेहद तेज गति से बिखरी, पार्टी की सभी समितियां भंग
पश्चिम बंगाल विधानसभा में 58 बागी विधायकों द्वारा पहली बार के विधायक ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता चुने जाने के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने बड़ा कदम उठाया है. पार्टी ने तत्काल प्रभाव से अपनी सभी मूल और सहयोगी संगठनों (Frontal Organisations) की समितियों को भंग कर दिया है. टीएमसी ने इसे व्यापक आत्मनिरीक्षण और सांगठनिक पुनर्गठन की प्रक्रिया बताया है, जबकि दूसरी ओर वरिष्ठ नेताओं ने बागियों के इस कदम को कानूनी रूप से अवैध ठहराया है. हस्ताक्षर जालसाजी की सीआईडी जांच और सुवेंदु अधिकारी की बैठक के बीच गहराते इस राजनीतिक संकट पर पढ़ें पूरी रिपोर्ट.
तृणमूल में बड़ी फूट, निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता बने
पश्चिम बंगाल की 18वीं विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर एक बड़ी बगावत सामने आई है. पार्टी से हाल ही में निष्कासित किए गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (LoP) नियुक्त किया गया है, जिन्होंने टीएमसी के 80 में से 58 विधायकों के समर्थन का दावा किया है. इससे पहले, फिरहाद हकीम और कुणाल घोष सहित टीएमसी के 20 विधायकों ने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में राज्य सचिवालय में आयोजित प्रशासनिक बैठक में हिस्सा लिया, जिससे ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस गहरे राजनीतिक संकट में घिर गई है. पढ़ें पूरी रिपोर्ट.
हरीश खरे | मोदी राज के 12 साल: हिंदुत्व शासन के ‘आशीर्वाद’ की भारी कीमत चुका रहे हैं भारत के हिंदू
द ट्रिब्यून’ के पूर्व प्रधान संपादक हरीश खरे ने मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर हिंदुत्व की राजनीति और प्रशासनिक जवाबदेही का कड़ा मूल्यांकन किया है. खरे के अनुसार, पिछले एक दशक में धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों को राजनीतिक विमर्श के केंद्र में रखकर बहुसंख्यक समाज को सुरक्षा का संदेश तो दिया गया, लेकिन शासन की विफलताओं, कमरतोड़ महंगाई, रोजगार के संकट और नीट जैसे परीक्षा घोटालों की सबसे बड़ी मानवीय व आर्थिक कीमत भी इसी बहुसंख्यक समाज के युवाओं और परिवारों को चुकानी पड़ी है. लोकतांत्रिक जवाबदेही और कॉरपोरेट असमानता पर पढ़ें यह पूरा आलेख.
जवाबदेही शून्य! रेल हादसे, आतंकी हमले, परीक्षा घोटाले और जिम्मेदारी से बचती मोदी सरकार
हालिया नीट-यूजी पेपर लीक और सीबीएसई के डिजिटल ऑन-स्क्रीन मार्किंग विवाद ने केंद्र सरकार की प्रशासनिक जवाबदेही पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. इस विशेष आलेख में पिछले एक दशक के दौरान हुए बड़े संकटों—जैसे 2019 के पुलवामा व 2025 के पहलगाम आतंकी हमले, 2023 के बालासोर रेल हादसे, कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान प्रवासियों का संकट और 2016 की नोटबंदी की मानवीय कीमत का लेखा-जोखा पेश किया गया है. संस्थागत स्तर पर केवल निचले कर्मचारियों पर कार्रवाई और मंत्रियों द्वारा नैतिक जिम्मेदारी न लेने की राजनीतिक संस्कृति पर पढ़ें यह पूरा विश्लेषण.
‘नमामि गंगे’ पर हजारों करोड़ खर्च, फिर भी गंदा बह रहा है गंगा का पानी
उत्तराखंड में गंगा को प्रदूषण मुक्त करने की केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘नमामि गंगे’ गंभीर संकट में है. भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा ऑडिट रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि राज्य के 44 सीवेज शोधन संयंत्रों (STP) में से 12 बिना उपचार के ही गंदा पानी सीधे गंगा नदी में छोड़ रहे हैं. पानी में मलजनित जीवाणुओं (Fecal Coliform) का स्तर तय मानकों से अरबों गुना अधिक पाए जाने, सीवर नेटवर्क की बदहाली और राज्य स्वच्छ गंगा मिशन की प्रशासनिक नाकामियों पर पढ़ें यह विस्तृत रिपोर्ट.
17 साल के सार्थक सिद्धांत ने संसदीय समिति के सामने सीबीएसई की अनियमितताओं को उजागर किया
झारखंड के 17 वर्षीय छात्र सार्थक सिद्धांत ने सीबीएसई (CBSE) की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली की निविदा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को उजागर करते हुए कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली संसदीय स्थायी समिति के सामने अपने निष्कर्ष पेश किए हैं. कक्षा 12वीं के छात्र सार्थक ने सात पन्नों का एक दस्तावेज़ सौंपकर बोर्ड की टेंडर प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए, जिसके कुछ ही घंटों बाद सीबीएसई अध्यक्ष राहुल सिंह का तबादला कर दिया गया. इस बीच, सीबीएसई ने समिति को रिपोर्ट सौंपकर उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन (Revaluation) की तारीख 6 जून 2026 तक बढ़ाने की जानकारी दी है. पढ़ें पूरी रिपोर्ट.
आंध्र प्रदेश का एआई सपना और साक्षरता का संकट
आंध्र प्रदेश आज खुद को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर और डिजिटल इनोवेशन के बड़े केंद्र के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन पीएलएफएस 2023-24 के आंकड़े एक गहरे सामाजिक और शैक्षिक संकट की ओर इशारा करते हैं. राज्य की साक्षरता दर महज 72.6% है, जो राष्ट्रीय औसत (80.9%) से काफी कम है और बिहार जैसे राज्यों से भी पीछे है. आईआईटी-नीट टॉपर्स देने वाले राज्य में 13,000 एकल-शिक्षक स्कूलों, कमजोर लर्निंग आउटकम और हाई-टेक भविष्य के दावों के बीच छिपे इस विरोधाभास पर पढ़ें यह पूरी रिपोर्ट.
दिपके के आव्हान का दबाव: सीबीएसई के अध्यक्ष और सचिव का तबादला
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के 12वीं कक्षा के डिजिटल 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग' (OSM) मूल्यांकन में गड़बड़ी के बाद सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है. विवाद बढ़ता देख सीबीएसई के अध्यक्ष राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का तबादला कर दिया गया है, साथ ही क्षमता निर्माण आयोग की अध्यक्ष एस राधा चौहान की अगुवाई में जांच समिति गठित की गई है. इस बीच, विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मूल्यांकन करने वाली निजी कंपनी 'कोएम्प्ट' पर तेलंगाना के 2019 के 'ग्लोबरेना' विवाद से जुड़े होने और सोची-समझी साजिश के तहत ठेका हासिल करने का गंभीर आरोप लगाया है, जिसे बोर्ड ने खारिज कर दिया है. पढ़ें पूरी रिपोर्ट
सोनम वांगचुक ने शिक्षा मंत्री से इस्तीफे की मांग की, अन्यथा ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के आंदोलन में होंगे शामिल
प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने ऑनलाइन आंदोलन 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के प्रति एकजुटता व्यक्त की है. वांगचुक ने घोषणा की है कि यदि 5 जून तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं होता है, तो वह 6 जून को दिल्ली में सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में शामिल होंगे. पिछले चार दशकों के अपने शैक्षिक संघर्ष, नीट (NEET) पेपर लीक और देश की शिक्षा नीतियों की कमियों पर सोनम वांगचुक का पूरा वीडियो संदेश यहाँ पढ़ें.
सुभाष चंद्र गर्ग | मोदी के नेतृत्व में भारत ‘फ्रेजाइल फाइव’ से ‘वल्नरेबल वन’ बन गया है
पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने ‘डेक्कन हेराल्ड’ में प्रकाशित अपने लेख में मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों और बुनियादी व्यापक-आर्थिक आंकड़ों पर गंभीर सवाल उठाए हैं. गर्ग के अनुसार, नॉमिनल जीडीपी और वास्तविक विकास दर के भ्रामक आंकड़ों, डब्ल्यूपीआई (WPI) मुद्रास्फीति के 8% पार होने, स्थिर निर्यात और एफडीआई (FDI) के शुद्ध प्रवाह के शून्य होने से भारत अब 'वल्नरेबल वन' (Vulnerable One) बनने की कगार पर है. वियतनाम जैसे पूर्वी एशियाई देशों की तुलना में भारत के निवेश इंजन के ठप होने पर पढ़ें यह विस्तृत आर्थिक विश्लेषण.
‘चुनाव बाद की हिंसा’ के विरोध में ममता बनर्जी धरने पर बैठीं
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनावों में भाजपा की जीत के बाद अपने कार्यकर्ताओं पर हुए कथित हमलों और मतगणना में धांधली के विरोध में 2 जून 2026 को मध्य कोलकाता में एक दिवसीय धरना दिया. कोलकाता पुलिस द्वारा मंच और माइक की अनुमति न मिलने के बाद ममता बनर्जी ने मेगाफोन का इस्तेमाल कर एस्प्लेनेड के वाई-चैनल पर भीड़ को संबोधित किया. इस विरोध प्रदर्शन के दौरान फिरहाद हकीम और कल्याण बनर्जी जैसे पुराने दिग्गज तो नजर आए, लेकिन पार्टी के नए जीते हुए विधायकों की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी रही. पढ़ें पूरी ग्राउंड रिपोर्ट.
सिर्फ पानी नहीं, अपना स्वास्थ्य भी ढो रही हैं महाराष्ट्र की आदिवासी महिलाएं
महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले के आदिवासी गांवों में पानी लाना केवल एक घरेलू काम नहीं, बल्कि एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन चुका है. गर्मियों में कई किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई और सिर पर 10 किलो तक का वजन ढोने के कारण कम उम्र की युवतियों और गर्भवती महिलाओं में लगातार गर्भपात, पेट दर्द और गर्भाशय के बाहर निकल आने (Uterine Prolapse) जैसी दर्दनाक बीमारियां सामने आ रही हैं. स्वास्थ्य सेवाओं की कमी, कुपोषण और प्रशासनिक दावों के बीच घिरी आदिवासी महिलाओं की इस जमीनी हकीकत पर पढ़ें यह पूरी रिपोर्ट.

